ज्येष्ठ मास की अमावस्या इस बार 26 मई को मनाई जाएगी। इसे वट सावित्री अमावस्या भी कहते हैं। इस बार इसके सोमवार को आने से सोमवती अमावस्या के विशेष योग बन रहे हैं। यह अमावस्या पति की लंबी आयु, आत्मशुद्धि, पितृ तर्पण और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और तीर्थ स्नान से अक्षय पुण्य मिलता है
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में विशेष स्थान रखने वाली अपरा एकादशी इस वर्ष 23 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसे ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी भी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से जीवन में अपार पुण्य प्राप्त होता है, साथ ही मानसिक और आर्थिक कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।
पति की दीर्घायु और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है। इस साल यह व्रत 26 मई, सोमवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12:11 बजे से शुरू होकर 27 मई सुबह 8:31 बजे तक रहेगी।
इस वर्ष शनि जयंती 27 मई 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह दिन न्याय, कर्म और संतुलन के प्रतीक शनि ग्रह के प्राकट्य का पर्व है, जिसे देशभर में श्रद्धा और आत्मविचार के साथ मनाया जाता है। धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से यह दिन आत्मनिरीक्षण, विनम्रता और जीवन की दिशा को सुधारने का अवसर माना जाता है।
हर साल गंगा दशहरा के बाद शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह एकादशी 6 जून को मनाई जाएगी। इस मौके एक खास संयोग बन रहा है। तीन प्रमुख ग्रह शुक्र, बुध और बृहस्पति की युति बन रही है, जिससे यह दिन समाज, परिवार और आत्मिक विकास के लिए अत्यंत शुभ बन रहा है।
सूर्य देव आज (15 मई) वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है। यह दिन न केवल ज्योतिषीय रूप से विशेष है, बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्म विशेषकर स्नान, तर्पण और दान व्यक्ति के जीवन को शुद्ध और समृद्ध बनाते हैं।
हिंदू पंचांग का तीसरा महीना ज्येष्ठ महीना 13 मई से शुरू हो गया। अब यह 11 जून 2025 तक चलेगा। यह महीना केवल मौसम की तपिश के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी इसकी एक विशेष पहचान है।
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर आज देशभर में नृसिंह प्राकट्योत्सव मनाया जा रहा है। अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु इस दिन आधे नर और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्यप का वण किया था, जो स्वयं को भगवान मानने लगा था।
न्याय और कर्म के प्रतिनिधि शनिदेव ने 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश किया है। यह ग्रह अब जून 2027 तक इसी राशि में स्थित रहेगा। मीन राशि का स्वामी गुरु बृहस्पति होता है, और जब शनि इस भाव में प्रवेश करता है, तो यह स्थिति आध्यात्मिक दृष्टि से गंभीर मानी जाती है।
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जानेव वाला भगवान नृसिंह का जन्मोत्सव इस बार 11 मई, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु ने एक अद्भुत रूप धारण कर अपने भक्त की रक्षा की और अधर्म का अंत किया।
कश्मीर घाटी की बर्फीली वादियों में स्थित अमरनाथ की पवित्र गुफा से इस साल बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर सामने आ चुकी है। शिवभक्तों के लिए यह खबर आस्था और उल्लास से भर देने वाली है, क्योंकि इस बार गुफा में बना बर्फ का शिवलिंग करीब 7 फीट ऊंचा है।
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष को मनाई जाने वाली सीता नवमी इस बार 5 मई को मनाई जाएगी। नवमी तिथि की शुरुआत 5 मई को सुबह 7:35 बजे होगी और 6 मई को सुबह 8:38 बजे तक रहेगी।
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह ठीक 6 बजे खोले गए, जिसके साथ ही चारधाम यात्रा 2025 का औपचारिक शुभारंभ हो गया। कपाटोद्घाटन की पावन घड़ी में मुख्य पुजारी (रावल) ने पहले गणेश पूजा कर भगवान बद्रीविशाल के दरवाजे खोले।
इस महीने गुरु का राशि परिवर्तन मिथुन में होगा। यह परिवर्तन 14 मई को होगा। इस दिन से गुरु लगभग 5 महीने तक विशेष "अतिचारी चाल" में रहेंगे और 18 अक्टूबर को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। यह खगोलीय घटना केवल खगोल-आधारित नहीं है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
चारधाम यात्रा के तहत शुक्रवार को केदारनाथ धाम के पट खुल गए। पंचमुखी डोली पहुंचने के बाद यहां विधि विधान से पूजा हुइ और फिर सवेरे सात बजे मंदिर के पट खुले। पट खुलते ही हजारों श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए और दर्शन किए।
मई 2025 का महीना भारतीय संस्कृति और अध्यात्म प्रेमियों के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है। वैशाख और ज्येष्ठ महीनों का संयोग होने से यह समय धार्मिक अनुष्ठानों, पूजन विधियों और सामाजिक परंपराओं के लिहाज़ से अत्यंत समृद्ध रहेगा। इस महीने में जहां एक ओर भगवान बुद्ध और भगवान विष्णु के विविध रूपों की आराधना होगी, वहीं व्रत, उपवास और दान-पुण्य के अवसर भी मिलेंगे।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आज से चारधाम यात्रा 2025 का शुभारंभ हो गया। हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में शामिल इस यात्रा की शुरुआत के साथ ही देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उत्तराखंड की ओर उमड़ पड़ा है। गंगाजी की डोली गंगोत्री धाम पर पहुंच गई है, जबकि यमुना जी की डोली कुछ देर बाद पहुंचेगी। इसके बाद विधि विधान से पूजा कर दोनों धाम के पट खोल दिए जाएंगे। गंगोत्री धाम के पट करीब 10.57 बजे खुलेंगे जबकि यमुनोत्री धाम के पट 11.55 बजे खुलेंगे।
अक्षय तृतीया को सनातन संस्कृति में अमूल्य पुण्यफल देने वाला दिन माना गया है। यह पर्व न केवल देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष अवसर होता है, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
आज हिंदू पंचाग की सबसे लाभदायी और शुभ तिथि अक्षय तृतीया है। जिसमें कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के किया जा सकता है। यह तिथि धर्म, सेवा, दान और आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।इस दिन समाज में दान, संयम और सद्भाव की भावना का संचार होता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज (30 अप्रैल, मंगलवार) अक्षय तृतीया का पर्व है, जिसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि ‘अबूझ मुहूर्त’ कहलाती है, यानी आज किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।
हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन मनाई जाने वाली गंगा सप्तमी इस वर्ष 3 मई 2025 को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा महाराजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न हाेकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। भारतीय संस्कृति में गंगा न केवल जल की स्रोत, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और धार्मिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। गंगा सप्तमी की तिथि 3 मई को सवेरे 7:51 बजे से शुरू होगी और 4 मई को सुबह 07:18 बजे तक रहेगी।
भारतीय जीवन शैली में ऋतुओं और महीनों का विशेष महत्व है। खास तौर पर खानपान को लेकर कई नियम ऋतुओं के अनुसार शरीर और मन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। बात यदि मई माह की जाए तो इस दौरान भारतीय मास का वैशाख और ज्येष्ठ मास होता है। ऐसे में इस दौरान शरीर को ऐसे भोजन की आवश्यकता होती है जो गर्मी से बचाता हो और स्वस्थ रखता हो।
भारत में अक्षय तृतीया को ऐसे शुभ अवसर के रूप में देखा जाता है जब जीवन में नई शुरुआत और निवेश को अत्यंत फलदायी माना जाता है। 30 अप्रैल को पड़ने वाली इस तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का प्रचलन है। इस दिन सोना-चांदी खरीदने की परंपरा तो प्रसिद्ध है, लेकिन यदि आर्थिक सीमाएं हों, तो भी कई सरल विकल्प उपलब्ध हैं जिन्हें शुभ और समृद्धिदायक माना गया है।