राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी। इस दौरान उनके साथ स्क्वॉड्रन लीडर शिवांगी सिंह नजर आईं, जिनके बारे में पाकिस्तान ने झूठा दावा किया था कि उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पकड़ा गया है। PIB ने पहले ही पाकिस्तान के इस दावे को गलत बताया था। मुर्मू ने करीब 40 मिनट की उड़ान भरी और भारतीय वायुसेना के दो फाइटर विमानों में उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति बन गईं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भरी राफेल में उड़ान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार सुबह अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से फाइटर जेट राफेल में उड़ान भरी। यह उड़ान करीब 40 मिनट की थी। राफेल ने सुबह 11:10 बजे टेक ऑफ किया और 11:50 बजे लैंड किया। राष्ट्रपति के साथ मौजूद फाइटर जेट को ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी उड़ा रहे थे, जबकि एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह दूसरे एयरक्राफ्ट से एस्कॉर्ट कर रहे थे। राष्ट्रपति मुर्मू भारतीय वायुसेना के दो फाइटर विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बन गईं।
शिवांगी सिंह के साथ राष्ट्रपति की तस्वीर वायरल
उड़ान के बाद राष्ट्रपति की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें वह स्क्वॉड्रन लीडर शिवांगी सिंह के साथ नजर आईं। शिवांगी वही पायलट हैं जिन्हें पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पकड़े जाने का दावा किया था। पाकिस्तान मीडिया ने झूठी रिपोर्ट में कहा था कि शिवांगी युद्धबंदी हैं। हालांकि PIB ने 10 मई को फैक्ट चेक में इन दावों को पूरी तरह गलत बताया था। शिवांगी वाराणसी की रहने वाली हैं और भारतीय वायुसेना में राफेल उड़ाने वाली चुनिंदा महिला पायलटों में से एक हैं।
राष्ट्रपति के सम्मान में सख्त सुरक्षा इंतजाम
राष्ट्रपति मुर्मू सुबह 9:15 बजे विशेष विमान से अंबाला पहुंचीं। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण भी किया। इस दौरान एयरफोर्स स्टेशन के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। ड्रोन उड़ाने पर रोक थी और सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। मोबाइल फोन ले जाने पर भी पाबंदी रखी गई थी ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
पहले भी सुखोई जेट में उड़ान भर चुकी हैं राष्ट्रपति मुर्मू
यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट में उड़ान भरी। इससे पहले उन्होंने 7 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। उस वक्त उन्होंने 30 मिनट की उड़ान में ब्रह्मपुत्र और तेजपुर वैली को कवर किया था। विमान को ग्रुप कैप्टन नवीन कुमार ने उड़ाया था। राष्ट्रपति ने उस उड़ान में वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता और तकनीकी जानकारी भी ली थी। अब राफेल उड़ान के साथ उन्होंने इतिहास में एक और नाम दर्ज किया है।
भारत में राफेल की कहानी और अहमियत
राफेल लड़ाकू विमान भारत को फ्रांस से मिले हैं। पहली खेप 27 जुलाई 2020 को भारत पहुंची थी जिसमें पांच विमान शामिल थे। ये सीधे फ्रांस के मेरिग्नैक एयरबेस से उड़ान भरकर अंबाला एयरबेस पहुंचे थे। 10 सितंबर 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली की मौजूदगी में इन विमानों को 17वीं स्क्वॉड्रन “गोल्डन एरोज” में शामिल किया गया था। राफेल की मौजूदगी ने भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ाई है।

- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला एयरबेस से राफेल जेट में 40 मिनट की उड़ान भरी।
- उनके साथ दिखीं स्क्वॉड्रन लीडर शिवांगी सिंह, जिन पर पाकिस्तान ने झूठा दावा किया था।
- PIB ने पाकिस्तान के दावे को फेक बताया था।
- राष्ट्रपति मुर्मू भारतीय वायुसेना के दो फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।
- राफेल की पहली खेप 2020 में अंबाला एयरबेस पर पहुंची थी।

