सावन का महीना भारतीय धार्मिक परंपरा में न केवल शिव आराधना का समय है, बल्कि आत्म-चिंतन, संयम और सामाजिक सहभागिता का भी अवसर होता है। इस माह में भगवान शिव की विशेष पूजा और अभिषेक करने से जीवन में सभी कष्ट और दुख दूर होते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सावन मास के साथ ही श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में डूब गए हैं। देशभर के शिव मंदिराें में तरह तरह के आयोजन हो रहे हैं। इस साल श्रावण मास का शुभारंभ 11 जुलाई को हो चुका है। ऐसेमें इसका पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई यानी कल है।
सावन का पावन महीना इस बार ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास बन गया है। 11 जुलाई 2025 से शुरू हो रहे इस शुभ काल में भगवान शिव की विशेष कृपा के साथ-साथ ग्रहों का ऐसा महासंयोग बन रहा है, जो करीब 500 वर्षों में पहली बार दिखाई देगा।
भारतीय वर्ष में सावन का महीना कुछ अलग ही महत्व रखता है। बारिश के मौसम में जब धरती हरी चादर ओढ़ती है, उसी वक्त भक्तजन शिव की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। यह महीना न सिर्फ एक ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन में एक नयापन भी लेकर आता है।
भगवान शिव की आराधना का विशेष माह सावन शीघ्र ही आने वाला है। सावन माह में उत्तर भारत की गलियों से लेकर झारखंड और महाराष्ट्र के कांवड़ पथों तक, शिवभक्ति का स्वरूप आस्था से आगे बढ़कर समुदाय की सहभागिता बन जाता है।
तुलसी को लेकर लोग कई बातें मानते हैं, लेकिन जब वास्तुशास्त्र की नजर से देखा जाए, तो बात और गहराई से समझ में आती है। उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण- बस यही वह ज़ोन है जहां तुलसी को लगाना सबसे अधिक शुभ माना गया है।
भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में घर के मुख्य द्वार का विशेष स्थान है। इसे केवल एक प्रवेशद्वार न मानकर ऊर्जा, शांति और समृद्धि के प्रवाह का अहम मार्ग समझा जाता है।
जेठ माह में आने वाले मंगलवारों को लेकर उत्तर भारत में एक गहरा धार्मिक भाव जुड़ा है। इन्हीं में से सबसे विशेष दिन होता है अंतिम बड़ा मंगल, जो 10 जून 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भक्तों के लिए सिर्फ एक पूजन तिथि नहीं, बल्कि समर्पण, सेवा और श्रद्धा की जीवंत मिसाल भी है।
पूर्णिमा तिथियों का सनातन धर्म में विशेष स्थान है। प्रत्येक पूर्णिमा का अपनी-अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं हैं, जिनमें से ज्येष्ठ पूर्णिमा को विशेष रूप से माना जाता है। यह दिन पूजा-पाठ, व्रत, स्नान, और दान के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मुस्लिम समजा का दूसरा सबसे बड़ा पर्व बकरीद यानी ईद-उल-अजहा आज (7 जून, शनिवार) को मनाया जाएगा। मुस्लिम समाज में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह है। सवेरे देशभर में मस्जिदों में विशेष नमाज होगी, इसके बाद एक दूसरे को मुबारक बाद दी जाएगी।
हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का स्थान अत्यंत विशेष है। इसे सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को वर्षभर की सभी 24 एकादशियों का पुण्यफल प्राप्त होता है।
हर वर्ष आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का विशेष स्थान है, जो ना केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है, बल्कि आत्म अनुशासन और त्याग की भी चरम परीक्षा है। इस व्रत का पालन जेठ माह की भीषण गर्मी में किया जाता है, जब तपती धूप और बढ़ता तापमान शारीरिक संतुलन को चुनौती देता है।
गंगा दशहरा, सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ता एक आध्यात्मिक अवसर है। पुराणों के अनुसार, ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में गंगा माता का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। यह दिन हर वर्ष ‘गंगा दशहरा’ के रूप में मनाया जाता है।
हर साल ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा इस बार 5 जून 2025 को पड़ रहा है। यह पर्व न केवल गंगा नदी की आराधना का अवसर है, बल्कि दान, स्नान और संयम से जुड़े सामाजिक मूल्यों को भी उजागर करता है।
जून महीना प्रारंभ होने वाला है। भारतीय पंचांग के अनुसार इस महीने में हिंदू महीने ज्येष्ठ और आषाढ़ होंगे। जिनमें कई प्रमुख त्योहार, व्रत और उत्सव आएंगे। एक ओर गंगा दशहरा से निर्जला एकादशी तक उपवास और स्नान की परंपराएं निभाई जाएंगी, वहीं दूसरी ओर सामूहिक आस्था के प्रतीक जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे उत्सव भी होंगे।
न्याय के देवता शनिदेव का जन्मोत्सव मंगलवार (27 मई) को मनाया जाएगा। इस अवसर पर शनि मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया गया है। जहां दिनभर तेलाभिषेक और दान पुण्य के आयोजन होंगे। इस बार शनि जन्मोत्सव पर द्विपुष्कर, सर्वार्थ सिद्धि, सुकर्मा योग और कृत्तिक-रोहिणी नक्षत्र जैसे संयोग भी बन रहे हैं।
शनि जयंती का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है. शनि जन्मोत्सव का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस साल अमावस्या तिथि 26 मई दोपहर 12:11 बजे से शुरू होकर 27 मई सुबह 8:31 बजे तक है, ऐसे में उदयातिथि के अनुसार जन्मोत्सव 27 मई को मनाया जाएगा।
शनि जयंती का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है. शनि जन्मोत्सव का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस साल 26 मई और 27 मई दोनों दिन अमावस्या तिथि होने से लोगों में इस बात को लेकर असमंजस है कि शनि जन्मोत्सव कब मनाया जाए।
वट सावित्री व्रत आज (26 मई) को मनाया जा रहा है। हालाकि कई जगहों पर यह मंगलवार को भी मनाया जाएगा। इस बार वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का संयोग श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष अवसर लेकर आया है।
वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या आज (26 मई) को मनाई जा रही है। इस बार अमावस्या पर सोमवार होने से शुभ संयाेग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत करने से सौभाग्य, संतान सुख और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।