जेठ माह में आने वाले मंगलवारों को लेकर उत्तर भारत में एक गहरा धार्मिक भाव जुड़ा है। इन्हीं में से सबसे विशेष दिन होता है अंतिम बड़ा मंगल, जो 10 जून 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भक्तों के लिए सिर्फ एक पूजन तिथि नहीं, बल्कि समर्पण, सेवा और श्रद्धा की जीवंत मिसाल भी है।
इस दिन को लेकर लोक परंपराओं में यह मान्यता रही है कि जेठ माह के मंगलवार को भगवान राम और बजरंगबली की पहली भेंट हुई थी। इसलिए यह मंगलवार अन्य दिनों से विशिष्ट माना जाता है। आम बोलचाल में इसे “बुढ़वा मंगल” भी कहा जाता है, जहां वृद्ध स्वरूप में हनुमान की पूजा का विशेष महत्व है।
हनुमान मंदिरों में रहेगी भीड़, भक्त करेंगे विशेष पूजन
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और बनारस जैसे शहरों में इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष तैयारियां रहती हैं। श्रद्धालु सुबह से ही व्रत रखकर मंदिर पहुंचते हैं। पूजा-पाठ, मंगला आरती, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का सामूहिक पाठ जैसे आयोजन होते हैं।
भक्त हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते हैं, चमेली का तेल अर्पित करते हैं और लाल रंग के पुष्प एवं वस्त्र समर्पित करते हैं। इस दिन इमरती, लड्डू, नारियल और गुड़-चना से भोग लगाने की भी परंपरा है।
दान, सेवा और हनुमान चालीसा का पाठ विशेष माना गया
धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन लाल वस्तुएं—जैसे लाल मसूर की दाल, लाल वस्त्र, गुड़—दान करने से जीवन में मंगलकारक परिवर्तन होते हैं। मंदिरों के बाहर बंदरों को केला और गुड़ चना खिलाना भी शुभ माना गया है।
हनुमान चालीसा का पाठ इस दिन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु 5, 7 या 11 बार पाठ करके बजरंगबली की कृपा पाने की कामना करते हैं। कई जगहों पर विशाल भंडारे और सेवा कार्य भी किए जाते हैं, जो सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं।
समुदाय की आस्था और संस्कृति का उत्सव
अंतिम बड़ा मंगल न केवल धार्मिक पूजन का अवसर है, बल्कि यह भारतीय समाज की सामूहिक आस्था, सेवा भावना और लोकसंस्कृति का भी उत्सव बन गया है। यह दिन हमें जोड़ता है—परिवार से, समाज से और उस परंपरा से, जिसने सदियों से श्रद्धा और भक्ति को जीवंत बनाए रखा है।

