देशभर में भक्ति और उत्साह के साथ गणेश चतुर्थी 2025 का महापर्व कल से शुरू हो रहा है. दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना से होगी और समापन 6 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ होगा. इस त्योहार को खासतौर पर महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.
गणेश चतुर्थी का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है. उन्हें बुद्धि, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था. इसी वजह से इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति आती है.
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस साल गणेश चतुर्थी की तिथि 26 अगस्त दोपहर 1:54 बजे से शुरू होकर 27 अगस्त दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी. गणपति की स्थापना का शुभ समय 27 अगस्त की सुबह 11:01 से दोपहर 1:40 तक का है. दूसरा मुहूर्त दोपहर 1:39 से शाम 6:05 बजे तक रहेगा. इन समयों में स्थापना करने से पूजा का फल शुभ माना जाता है.
पूजन का समय और विधि
कल पूजा का शुभ समय सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा. घर में पूजा शुरू करने से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल पर कलश में जल भरकर गणपति की मूर्ति स्थापित करें. गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, मोदक और घी अर्पित करें. पूजा के बाद प्रसाद परिवार और जरूरतमंद लोगों में बांटें.
विसर्जन की तिथि
गणेश चतुर्थी के दस दिनों तक चलने वाले उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी यानी 6 सितंबर को होगा. इस दिन भक्त भावनाओं के साथ गणपति का विसर्जन करेंगे और अगले साल फिर से आने का निमंत्रण देंगे.

- गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व 27 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर को विसर्जन के साथ खत्म होगा.
- गणपति स्थापना का शुभ समय 11:01 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा.
- दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 1:39 से शाम 6:05 बजे तक का है.
- पूजा के लिए गणपति को सिंदूर, दूर्वा, घी और 21 मोदक का भोग लगाएं.
- गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर होगा, जब भक्त श्रद्धा के साथ बप्पा को विदा करेंगे.

