Thursday, October 8, 2026
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सावन में दो शुभ एकादशी व्रत: जानें देवशयनी और कामिका की तिथि, महत्त्व और पूजा का सही समय

सभी व्रतों में एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस बार जुलाई माह में दो एकादशी हैं। एक आषाढ़ मास की और एक सावन मास की। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, इस बार 6 जुलाई को पड़ रही है। परंपराओं के अनुसार, यही वह तिथि है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, और इसी के साथ चार माह का चातुर्मास भी आरंभ हो जाता है। इन चार महीनों में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर स्वाभाविक विराम लग जाता है।

देवशयनी एकादशी को मोक्षदायिनी कहा जाता है। इस दिन उपवास और विष्णु की प्रतिमा का पूजन करने वालों को विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है।

कब होगी देवशयनी एकादशी

इस वर्ष देवशयनी एकादशी तिथि 5 जुलाई की शाम 6:58 बजे शुरू होकर 6 जुलाई रात 9:14 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण अगले दिन, यानी 7 जुलाई को सुबह 5:29 से 8:16 के बीच करना श्रेष्ठ माना गया है।

सावन सोमवार संग कामिका एकादशी का महासंयोग

जुलाई माह की दूसरी एकादशी 21 जुलाई को पड़ रही है, जिसे कामिका एकादशी कहा जाता है। यह व्रत सावन के कृष्ण पक्ष में आता है और इस बार विशेष बात यह है कि कामिका एकादशी सोमवार को पड़ रही है। ऐसे में भक्तों के लिए यह व्रत शिव और विष्णु दोनों की आराधना का दुर्लभ अवसर बन गया है।

कामिका एकादशी को मन, वाणी और कर्म की शुद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को सभी प्रकार की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त होती है।

कब होगी कामिका एकादशी

 इस बार यह तिथि 20 जुलाई दोपहर 12:13 बजे से शुरू होकर 21 जुलाई सुबह 9:38 बजे तक रहेगी। पूजन का श्रेष्ठ समय 21 जुलाई को सुबह 9:02 से 10:45 के बीच है, जबकि व्रत का पारण 22 जुलाई को सुबह 5:37 से 7:05 बजे तक किया जा सकता है।

धार्मिक आयोजन के चातुर्मास

एकादशी व्रत केवल आत्मिक अनुशासन नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन में संतुलन और संयम का भी प्रतीक हैं। चातुर्मास के चार महीने न केवल तप और साधना के होते हैं, बल्कि यही काल होता है जब शहरी और ग्रामीण समाजों में धार्मिक संगठनों, मंदिरों और लोक परंपराओं के माध्यम से सामाजिक संवाद और सहयोग के अनेक अवसर निर्मित होते हैं। देवशयनी और कामिका एकादशी जैसे पर्व न केवल व्यक्ति की आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि समाज को भी एकजुट और संतुलित बनाए रखने की प्रक्रिया को पुष्ट करते हैं।

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