Tuesday, October 27, 2026
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सावन का पहला सोमवार और संकष्टी चतुर्थी एक साथ, शिव-गणेश की दुर्लभ पूजा का शुभ संयोग

सावन मास के साथ ही श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में डूब गए हैं। देशभर के शिव मंदिराें में तरह तरह के आयोजन हो रहे हैं। इस साल श्रावण मास का शुभारंभ 11 जुलाई को हो चुका है। ऐसेमें इसका पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई यानी कल है। खास बात यह है कि इसी दिन भगवान गणेश को समर्पित गजानन संकष्टी चतुर्थी भी पड़ रही है। ऐसे में भगवान शिव के साथ ही गणेश जी पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।

एक दिन, दो आस्थाएँ: शिव और गणेश की पूजा

14 जुलाई का दिन भक्तों के लिए एक विशेष संयोग लेकर आया है। शिवभक्तों के लिए पहला सोमवार और गणेश उपासकों के लिए संकष्टी चतुर्थी। पंचांग गणना के अनुसार यह दुर्लभ संयोग तब बनता है जब श्रावण मास का पहला सोमवार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आता है। हिन्दू परंपरा में पिता-पुत्र के रूप में पूज्य शिव और गणेश की एकसाथ आराधना को अत्यंत फलदायी माना जाता है। 

सावन सोमवार के पांच विशेष योग

इस दिन को और भी विशेष बनाते हैं पांच अद्भुत योग, जो व्रत और पूजा की शक्ति को और भी प्रबल करते हैं:

  • आयुष्मान योग: दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए श्रेष्ठ।
  • सौभाग्य योग: वैवाहिक और पारिवारिक सुख को समर्पित।
  • धनिष्ठा योग: आर्थिक प्रगति और सम्मान में वृद्धि के लिए अनुकूल।
  • शिव वास योग: शिव उपासना के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त।
  • गजानन संकष्टी चतुर्थी संयोग: विघ्नों के विनाश और सिद्धि प्राप्ति के लिए विशेष।

इनके अतिरिक्त, आद्रा नक्षत्र, हर्षण योग और भद्रा वास जैसे अन्य ग्रह-नक्षत्रीय संयोग भी इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को और सशक्त बनाते हैं।

पूजा विधि: श्रद्धा से भरे सरल चरण

इस विशेष दिन को पूर्णता प्रदान करने के लिए पूजा विधि में सावधानी और श्रद्धा दोनों आवश्यक हैं। प्रात:काल स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण कर, पूजास्थल पर दीप प्रज्वलित करें। सबसे पहले गणेश पूजन करें। मोदक, दूर्वा और सिंदूर अर्पित करें और व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। इसके पश्चात शिवलिंग पर जल चढ़ाकर बेलपत्र, भांग, धतूरा अर्पित करें और दीपक जलाएं।

धार्मिक परंपरा और सामाजिक जुड़ाव

ऐसे पर्व न केवल पूजा-अर्चना के माध्यम बनते हैं, बल्कि समाज को भी एक भावनात्मक सूत्र में बाँधते हैं। घरों में परिवार एकत्र होकर पूजा करते हैं, मंदिरों में सामूहिक भजन-कीर्तन होते हैं, और समाज में सेवा और दान के आयोजन होते हैं।

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