Wednesday, October 28, 2026
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सावन 2025 में शिववास योग का दुर्लभ संयोग, 14 जुलाई को आएगा पहला सोमवार

भगवान शिव की आराधना का विशेष माह सावन शीघ्र ही आने वाला है। सावन माह में उत्तर भारत की गलियों से लेकर झारखंड और महाराष्ट्र के कांवड़ पथों तक, शिवभक्ति का स्वरूप आस्था से आगे बढ़कर समुदाय की सहभागिता बन जाता है।

सावन का महीना सिर्फ पूजा-पाठ का समय नहीं है, बल्कि इस दौरान व्रत, जलाभिषेक, कथा-श्रवण और सामूहिक आयोजन जैसे अनुष्ठान समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हैं। श्रद्धालु भगवान शिव की दिनरात विशेष पूजा करते हैं और दूर–दूर से कावड़ लाकर भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित करते हैं।

इस वर्ष सावन मास 11 जुलाई से प्रारंभ होकर 9 अगस्त 2025 तक चलेगा। इस अवधि में चार सोमवार आएंगे, जिन्हें विशेष पुण्यदायक माना गया है।

  • पहला सोमवार: 14 जुलाई 2025
  • दूसरा सोमवार: 21 जुलाई 2025
  • तीसरा सोमवार: 28 जुलाई 2025
  • चौथा सोमवार: 4 अगस्त 2025

सावन का समापन 9 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा, जो पारिवारिक रिश्तों और भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है।

शिववास योग का शुभ संयोग

सावन का आरंभ इस बार ‘शिववास योग’ के साथ हो रहा है, जो दुर्लभ संयोगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में जब भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर विराजमान रहते हैं, तब उनका अभिषेक और ध्यान विशेष फलदायी होता है। ऐसे संयोग में की गई साधना को सौभाग्य, सुख और समृद्धि प्रदान करने वाला बताया गया है।

इस योग में गंगा जल से रुद्राभिषेक करना, ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप, और सोमवार व्रत का पालन अनेक भक्तों के लिए मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति का मार्ग बनता है।

व्रत, रुद्राभिषेक और सामूहिक अनुष्ठान

सावन केवल व्यक्ति की आस्था का विषय नहीं है—यह सामूहिक रूप से मनाया जाने वाला सामाजिक आयोजन भी बन गया है। कांवड़ यात्रा इसका सबसे जीवंत उदाहरण है, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर गंगा जल लाते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक साधना है, बल्कि अनुशासन, सेवा और धैर्य का सामाजिक अभ्यास भी।

वहीं, घरों में सोमवार के व्रत, मंदिरों में विशेष आरती, शिव पुराण पाठ और रात्रि जागरण जैसे आयोजन मोहल्ले और कस्बों की साझा धार्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।

पार्वती पूजन और मंगला गौरी व्रत: नारी शक्ति के सम्मान का पर्व

सावन का महीना केवल शिवभक्ति तक सीमित नहीं रहता। मंगलवार को मनाया जाने वाला मंगला गौरी व्रत, मातृ शक्ति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। विवाहित महिलाएं इस दिन अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख के लिए उपवास रखती हैं और देवी पार्वती का पूजन करती हैं। यह परंपरा स्त्री सम्मान, शक्ति और समर्पण की भारतीय संस्कृति में गहरी जड़ें दर्शाती है।

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