रविवार, जनवरी 25, 2026
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अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे मिलीं 85 नई झीलें, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका की मोटी बर्फ की चादर के नीचे 85 नई झीलों की खोज की है. ये झीलें पहले कभी दर्ज नहीं हुई थीं. दस साल के सैटेलाइट डेटा से खुलासा हुआ कि ये झीलें ‘सक्रिय’ हैं, यानी ये समय-समय पर खाली हो जाती हैं और फिर भर जाती हैं. इस बदलाव से ग्लेशियरों की स्थिरता पर असर पड़ सकता है और समुद्र स्तर बढ़ने का खतरा है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी के क्रायोसैट-2 सैटेलाइट ने यह डेटा दिया, जिसे ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स ने स्टडी कर 19 सितंबर को ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ जर्नल में प्रकाशित किया.

झीलों की खोज ने खोले नए राज

स्टडी में सामने आया कि पहले अंटार्कटिका में 146 सक्रिय सबग्लेशियल झीलें जानी जाती थीं, लेकिन अब इनकी कुल संख्या 231 हो गई है. रिसर्च टीम ने बताया कि झीलों का भरना और खाली होना बहुत दुर्लभ तरीके से देखा जाता है. दुनिया भर में अब तक सिर्फ 36 मौके दर्ज हुए थे, लेकिन इस स्टडी में 12 नए उदाहरण मिले और कुल आंकड़ा 48 हो गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव बताता है कि अंटार्कटिका की पानी की गतिविधियां बहुत अधिक डायनामिक हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

कैसे बनती हैं ये झीलें

अंटार्कटिका की सतह के नीचे झीलें तब बनती हैं जब धरती की अंदरूनी गर्मी ऊपर आती है या फिर बर्फ और बेडरॉक के घिसाव से तापमान बढ़ता है. इससे बर्फ पिघलकर पानी का रूप ले लेती है और झीलें तैयार हो जाती हैं. कई बार ये झीलें अचानक खाली हो जाती हैं, जिससे पानी बर्फ के नीचे फैलकर उसे और अधिक फिसलन भरा बना देता है. इसके कारण ग्लेशियर तेजी से महासागर की ओर खिसकते हैं और सीधे समुद्र स्तर को प्रभावित करते हैं.

सैटेलाइट से हुई पहचान

इस खोज के लिए वैज्ञानिकों ने 2010 से 2020 तक का डेटा इस्तेमाल किया. यूरोपियन स्पेस एजेंसी का क्रायोसैट-2 सैटेलाइट खासतौर पर समुद्री बर्फ और ग्लेशियर की मोटाई मापने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें लगा रडार अल्टीमीटर बर्फ की ऊंचाई में छोटे-छोटे बदलावों को भी पकड़ लेता है. वैज्ञानिकों ने दर्जनों जगहों पर बर्फ को ऊपर-नीचे होते देखा, जिससे साफ हुआ कि झीलें भर रही थीं और खाली भी हो रही थीं. खास बात यह रही कि 25 झीलों के क्लस्टर और 5 नए नेटवर्क भी मिले, जो आपस में जुड़े हुए हैं.

समुद्र स्तर पर खतरे की आशंका

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को और साफ करती है. अगर झीलों की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, तो अंटार्कटिका की बर्फ महासागर की तरफ तेजी से बढ़ सकती है. इससे वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि होगी और तटीय इलाकों पर खतरा मंडराएगा. विशेषज्ञों ने चेताया कि दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं. यही वजह है कि इस खोज को क्लाइमेट मॉडलिंग के लिए अहम माना जा रहा है. इससे भविष्य में समुद्र स्तर की सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी.

लगातार निगरानी की जरूरत

रिसर्चर्स का कहना है कि अंटार्कटिका का वॉटर सिस्टम हमारी सोच से कहीं ज्यादा जटिल है. इसलिए इसकी निगरानी लगातार जरूरी है. वैज्ञानिकों ने बताया कि भारत जैसे देशों के लिए भी यह अध्ययन महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्र स्तर बढ़ने से बंगाल की खाड़ी जैसे क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील हो जाएंगे. इस खोज ने यह भी साबित किया कि धरती के कई रहस्य अभी भी अनसुलझे हैं. वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि आगे और रिसर्च से जलवायु संकट के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिलेगी.

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे 85 नई सक्रिय झीलों की खोज हुई है.
  2. इससे अंटार्कटिका में सबग्लेशियल झीलों की संख्या 231 हो गई है.
  3. खोज यूरोपियन स्पेस एजेंसी के क्रायोसैट-2 सैटेलाइट के डेटा से हुई.
  4. इन झीलों का असर ग्लेशियरों और समुद्र स्तर पर पड़ सकता है.
  5. वैज्ञानिकों ने चेताया कि तटीय क्षेत्रों पर बाढ़ और डूबने का खतरा बढ़ सकता है.
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