शुक्रवार, मई 1, 2026
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हरियाणा की 10300 क्यूसेक डिमांड पर पंजाब ने जताई असहमति, 20 मई तक राहत नहीं

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की तकनीकी समिति की अहम बैठक 15 मई को हुई। इस बैठक में पंजाब सरकार के सचिव कृष्ण कुमार और मुख्य अभियंता शेर सिंह शामिल हुए। बैठक के बाद पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि बैठक में राजस्थान ने पंजाब का आभार व्यक्त किया। राजस्थान का कहना था कि जब उन्हें जल संकट का सामना करना पड़ा, तो पंजाब ने बिना हिचक पानी मुहैया कराया।

इसके उलट, हरियाणा ने एक बार फिर पुरानी मांग दोहराई। हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने पहले 8500 क्यूसेक पानी की मांग रखी थी, लेकिन बैठक में इस मांग को बढ़ाकर 10300 क्यूसेक कर दिया गया। जबकि इससे पहले हरियाणा ने अपने पत्रों में 9525 क्यूसेक पानी की मांग की थी।

पंजाब ने जताई असहमति, कहा—10300 क्यूसेक संभव नहीं

पंजाब के सिंचाई मंत्री गोयल ने कहा कि भाखड़ा मेन लाइन की अधिकतम क्षमता 11700 क्यूसेक है। इसमें से 3000 क्यूसेक पानी पंजाब के लिए जरूरी है। ऐसे में हरियाणा की बढ़ी हुई मांग पूरी करना फिलहाल संभव नहीं है। साथ ही, पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य भी चल रहा है, जो जल आपूर्ति पर प्रभाव डाल सकता है।

पंजाब सरकार के अधिकारियों ने यह स्थिति BBMB चेयरमैन के सामने रखी, जिनका जवाब था कि वे मामले को देखेंगे। मंत्री गोयल ने कहा कि हरियाणा बार-बार अव्यवहारिक मांग कर रहा है। चेयरमैन ने भी स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को नियमों का पालन करना चाहिए और स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालना जरूरी है।

पंजाब ने दिया मानवीय आधार पर पानी

सिंचाई मंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब फिलहाल हरियाणा को 4000 क्यूसेक पानी दे रहा है, वह भी केवल मानवीय आधार पर। यह पानी पंजाब का हक है और जब भी पंजाब को जरूरत होगी, वह अपनी मांग रखेगा। ऐसी स्थिति में हरियाणा को यह पानी वापस करना होगा।

फिलहाल यह लगभग तय है कि हरियाणा को 20 मई तक अतिरिक्त पानी नहीं मिल सकेगा, क्योंकि इस मसले की अगली सुनवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 20 मई को होनी है। इसके बाद 21 मई से हरियाणा को नए जल वर्ष का कोटा मिलने लगेगा।

नंगल हाइडल चैनल की मरम्मत का पूरा बोझ पंजाब पर

बैठक में यह बात भी सामने आई कि BBMB के अंतर्गत आने वाली नंगल हाइडल चैनल की मरम्मत का सारा खर्च पंजाब सरकार के खजाने से उठाया गया है। वर्ष 2010-11 से 2022-23 के बीच इस कार्य पर 32.69 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें पंजाब का हिस्सा 15.87 करोड़ था, जबकि हरियाणा और राजस्थान का संयुक्त हिस्सा 16.82 करोड़ बनता है। लेकिन अब तक इन दोनों राज्यों ने कोई भुगतान नहीं किया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही यह मुद्दा उठा चुके हैं कि पंजाब BBMB के कुल खर्च का 60 फीसदी भुगतान करता है, फिर भी बोर्ड उनके खिलाफ खड़ा नजर आता है। ऐसे में पंजाब सरकार ने यह सवाल उठाया है कि जब अन्य राज्य अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे, तो सिर्फ पंजाब पर ही वित्तीय बोझ क्यों डाला जाए।

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