बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी की है, जिसमें कई पुराने नेताओं के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया गया है। पार्टी ने इस सूची में जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। सीतामढ़ी, रीगा और गौरा बोराम जैसी सीटों पर बदलाव किए गए हैं। बीजेपी की रणनीति इस बार सामाजिक वर्गों और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की है। पहली लिस्ट में 50% से ज्यादा टिकट पिछड़े, दलित और महिला उम्मीदवारों को दिए गए हैं। गठबंधन की सीटों पर भी पार्टी ने अपना दावा बरकरार रखा है।
बीजेपी की पहली सूची में बदलावों की बौछार
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी पहली सूची जारी करते हुए कई सीटों पर बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने सामाजिक संतुलन पर जोर देते हुए पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों को उतारा है। सीतामढ़ी सीट से मिथिलेश कुमार का टिकट काटकर सुनील कुमार पिंटू को उम्मीदवार बनाया गया है। इसी तरह रीगा सीट पर मंत्री मोतीलाल प्रसाद की जगह बैद्यनाथ प्रसाद को मौका दिया गया है, जबकि गौरा बोराम से स्वर्णा सिंह का टिकट भी काटा गया है। पार्टी का दावा है कि यह लिस्ट प्रतिनिधित्व के लिहाज से संतुलित और समावेशी है।
ओबीसी, एससी-एसटी और महिलाओं को बड़ा प्रतिनिधित्व
बीजेपी की पहली लिस्ट में 20 ओबीसी, 11 अतिपिछड़ा, 8 महिलाएं और 6 एससी-एसटी उम्मीदवारों को टिकट मिला है। पार्टी के अनुसार, 50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट पिछड़े, दलित, वंचित और महिला वर्ग को दिए गए हैं। साथ ही भूमिहार समाज से 11, ब्राह्मण से 7, राजपूत से 15 और कई कायस्थ उम्मीदवारों को शामिल किया गया है। इस लिस्ट में पहली बार कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, खासतौर पर पटना साहिब, कुम्हरार, राजनगर और औरंगाबाद जैसी सीटों पर।
गठबंधन की सीटों पर बीजेपी ने दिखाया दम
बीजेपी की पहली लिस्ट जारी होने के साथ ही एनडीए के भीतर सीट बंटवारे की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पहले यह चर्चा थी कि दानापुर, अरवल, हिसुआ, लालगंज और तारापुर जैसी सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में जा सकती हैं। लेकिन बीजेपी ने इन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इससे साफ है कि पार्टी इस बार किसी भी सीट पर अपना आधार कमजोर नहीं होने देना चाहती और हर क्षेत्र में खुद की स्थिति मजबूत बनाए रखना चाहती है।
जेडीयू और एलजेपी की सीटों पर नहीं किया ऐलान
बीजेपी ने उन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं की है जो जेडीयू या एलजेपी (आर) के हिस्से में जा सकती हैं। इनमें ब्रह्मपुर, कहलगांव, बखरी और गोविंदगंज जैसी सीटें शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन सीटों को लेकर बातचीत जारी है और जल्द ही इन पर भी फैसला हो जाएगा। इस रणनीति से साफ है कि बीजेपी गठबंधन में तालमेल बनाए रखते हुए भी अपने राजनीतिक हितों की रक्षा करना चाहती है।
नए और पुराने चेहरों का संतुलन
बीजेपी की इस पहली सूची से यह साफ झलकता है कि पार्टी इस बार ‘नए जोश और पुराने अनुभव’ का मेल लेकर मैदान में उतर रही है। कई पुराने विधायकों का टिकट काटना संगठन के अंदर संदेश देता है कि प्रदर्शन के आधार पर ही मौका मिलेगा। वहीं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देना पार्टी की 2025 चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। इस लिस्ट से बीजेपी ने संकेत दिया है कि वह इस बार जातीय समीकरण और संगठनात्मक संतुलन दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।

- बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव की पहली उम्मीदवार सूची जारी की।
- कई पुराने विधायकों और मंत्रियों के टिकट काटे गए।
- लिस्ट में 50% से ज्यादा टिकट पिछड़े, दलित और महिलाओं को मिले।
- गठबंधन की कुछ सीटों पर भी बीजेपी ने अपने उम्मीदवार उतारे।
- कोर्ट पर 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।

