मंगलवार रात देश के 244 शहरों में अचानक ब्लैकआउट हो गया। लोगों को पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। देखते ही देखते घरों, दफ्तरों और सड़कों की लाइटें बंद कर दी गईं। हालांकि, यह कोई हमला नहीं था, बल्कि एक मॉक ड्रिल थी। इस एक्सरसाइज के जरिए लोगों को सिखाया गया कि अगर युद्ध या आतंकी हमले जैसी स्थिति में ब्लैकआउट हो जाए, तो कैसे बचा जाए।
पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक के बाद बढ़ी चौकसी
यह मॉक ड्रिल ऐसे समय पर हुई जब भारत ने पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। ये कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 15 दिन बाद हुई। ऐसे में ब्लैकआउट एक्सरसाइज को सुरक्षा तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
गृह मंत्रालय ने दिए थे आदेश, संवेदनशील शहरों को चुना गया
गृह मंत्रालय ने 5 मई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए थे। देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 244 जिलों को ‘सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट’ घोषित किया गया है। ये जिले सामान्य प्रशासनिक जिलों से अलग हैं, जिन्हें देश की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
तीन कैटेगरी में बांटे गए जिले, कुछ इलाके बेहद संवेदनशील
सभी 244 सिविल डिफेंस जिलों को उनकी सुरक्षा स्थिति के आधार पर तीन कैटेगरी में बांटा गया है। कैटेगरी-1 में सबसे ज्यादा खतरे वाले जिले रखे गए हैं, वहीं कैटेगरी-3 में कम खतरे वाले इलाकों को शामिल किया गया है। इस ब्लैकआउट ड्रिल में कैटेगरी-1 जिलों में सुरक्षा एजेंसियों की भी खास तैनाती रही।
स्कूल, ऑफिस और कॉलोनियों में सिखाए गए बचाव के तरीके
इस मॉक ड्रिल में सिर्फ लाइटें बंद नहीं की गईं, बल्कि लोगों को ये भी बताया गया कि ऐसे हालात में कैसे शांत रहें, कैसे लोगों को सुरक्षित निकाला जाए और कहां शेल्टर लेना है। स्कूल, ऑफिस, कॉलोनी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में डेमो के जरिए सिखाया गया कि अगर असली हमला हो जाए तो क्या करना है।

- भारत के 244 शहरों में अचानक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल करवाई गई।
- ड्रिल का मकसद लोगों को युद्ध या आतंकी हमलों की स्थिति में तैयार करना था।
- गृह मंत्रालय ने 5 मई को सभी राज्यों को मॉक ड्रिल कराने का आदेश दिया था।
- सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट को तीन सुरक्षा कैटेगरी में बांटा गया है।
- ड्रिल में लोगों को बचाव, शेल्टर लेने और निकासी के तरीके सिखाए गए।

