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चंद्र ग्रहण 2025: भारत समेत दुनिया भर में दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें सूतक काल और खास बातें

साल 2025 का दूसरा और आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात को लगेगा, जिसे दुनिया की लगभग 85 प्रतिशत आबादी देख पाएगी. यह ग्रहण भारत सहित एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में दिखाई देगा. भारत में सूतक काल भी मान्य होगा और धार्मिक दृष्टि से इसकी अहमियत और बढ़ जाएगी. चंद्र ग्रहण का सबसे खास नज़ारा रात 11 बजे से 12 बजकर 22 मिनट के बीच देखने को मिलेगा, जब चांद लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहते हैं.

चंद्र ग्रहण का समय और अवधि

7 सितंबर 2025 की रात 9 बजकर 58 मिनट से चंद्र ग्रहण शुरू होगा और यह 1 बजकर 26 मिनट तक चलेगा. यानी करीब 3 घंटे 29 मिनट तक इसका असर रहेगा. इस दौरान पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवधि 1 घंटा 22 मिनट की होगी. भारत में इसे देखने का सबसे अच्छा समय रात 11 बजे से 12 बजकर 22 मिनट तक होगा. उस वक्त चांद सबसे चमकीला लाल दिखाई देगा और लोग इसे आसानी से निहार पाएंगे.

दुनिया की 85% आबादी देखेगी नजारा

यह चंद्र ग्रहण पूरी दुनिया की लगभग 85 प्रतिशत आबादी को दिखाई देगा. भारत समेत एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के लोग इस नज़ारे को देख पाएंगे. हालांकि, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में रहने वाले लोग इसे नहीं देख सकेंगे क्योंकि वहां चांद के निकलने से पहले ही ग्रहण खत्म हो जाएगा. इससे यह खगोलीय घटना खास बन जाती है, क्योंकि इतनी बड़ी आबादी तक पहुंचने वाले ग्रहण कम ही होते हैं.

ब्लड मून का वैज्ञानिक कारण

इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहते हैं. वैज्ञानिक बताते हैं कि जब सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं, तो नीली रोशनी बिखर जाती है और लाल रोशनी ज्यादा मात्रा में चांद तक पहुंचती है. इसी वजह से ग्रहण के समय चांद लाल दिखाई देता है. यह खगोलीय घटना वैज्ञानिकों और आकाश देखने वालों दोनों के लिए खास होती है, क्योंकि इसका दृश्य अद्भुत और अनोखा होता है.

सूतक का समय और धार्मिक महत्व

भारत में चूंकि यह चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा. ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ या प्रतिमाओं का स्पर्श वर्जित हो जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, इस समय मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना और गंगाजल से शुद्धिकरण करना आवश्यक माना जाता है.

ग्रहण के बाद की परंपराएं

चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद लोग अपने घरों और मंदिरों की शुद्धि करते हैं. गंगाजल का छिड़काव और स्नान करना परंपरा का हिस्सा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किया गया दान-पुण्य विशेष फलदायी होता है. लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन, कपड़े या अन्य चीजों का दान करते हैं. ग्रहण के खत्म होने पर नए उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जाता है.

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. 7 सितंबर 2025 को लगेगा साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण.
  2. यह ग्रहण रात 9:58 से 1:26 तक चलेगा, कुल अवधि 3 घंटे 29 मिनट.
  3. भारत समेत दुनिया की 85% आबादी देख पाएगी ब्लड मून का नजारा.
  4. भारत में सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी दिन में ही शुरू हो जाएगा.
  5. ग्रहण के बाद स्नान, गंगाजल छिड़काव और दान-पुण्य करने की परंपरा निभाई जाएगी.
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