शनिवार, मई 2, 2026
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Credit Card Debt 2025: चार साल में 2 गुना बढ़ा कर्ज, EMI और ‘जीरो-कॉस्ट’ ऑफर्स ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

भारत में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ा है, उसी रफ्तार से लोगों का बकाया कर्ज भी बढ़ गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2025 तक बकाया क्रेडिट कार्ड कर्ज ₹2.91 लाख करोड़ पहुंच गया. जबकि जुलाई 2021 में यह आंकड़ा सिर्फ ₹1.32 लाख करोड़ था. यानी महज चार साल में यह 2.2 गुना हो गया. क्रेडिट कार्ड की संख्या और हर कार्ड पर बकाया रकम दोनों ही लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ने लगा है.

क्रेडिट कार्ड कर्ज में उछाल

RBI के Database on Indian Economy के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2021 में देश में 6.34 करोड़ क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल हो रहे थे. जुलाई 2025 तक यह संख्या बढ़कर 11.16 करोड़ पहुंच गई. यानी 76% की बढ़ोतरी. सिर्फ कार्ड की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि हर कार्ड पर औसत बकाया रकम भी बढ़ गई. 2021 में औसत ₹20,900 का बकाया था, जो जुलाई 2025 में बढ़कर ₹26,100 हो गया. यह 25% की बढ़ोतरी है. यह साफ करता है कि लोग पहले से ज्यादा उधार लेकर खर्च कर रहे हैं.

EMI और जीरो-कॉस्ट का भ्रम

इस कर्ज बूम में EMI स्कीमें अहम भूमिका निभा रही हैं. बैंक और फिनटेक कंपनियां ग्राहकों को महंगे सामान EMI पर खरीदने के लिए आकर्षित करती हैं. कई बार इन योजनाओं में ब्याज भी शामिल होता है. इसी को देखते हुए RBI ने नियम सख्त किए. अब EMI में ब्याज और प्रिंसिपल का पूरा ब्रेकअप देना जरूरी है. इसके अलावा, जिन EMI में ब्याज लगता है, उन्हें ‘जीरो-कॉस्ट’ बताना पूरी तरह बैन कर दिया गया है. इन नियमों का मकसद ग्राहकों को सही जानकारी देना और छिपी हुई लागत से बचाना है.

RBI का हस्तक्षेप

क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे unsecured loans में तेजी से बढ़ते कर्ज को देखते हुए RBI ने नवंबर 2023 में दखल दिया. केंद्रीय बैंक ने बैंकों को ऐसे लोन पर ज्यादा पूंजी अलग रखने का निर्देश दिया. यानी अब जोखिम वाले लोन पर ज्यादा risk weight लगाना जरूरी है. इस कदम का उद्देश्य इन लोन की तेज ग्रोथ को थोड़ा धीमा करना और बैंकिंग सिस्टम को संतुलित रखना है. RBI लगातार इस पर नजर रख रहा है ताकि समस्या बढ़ने से पहले उसे रोका जा सके.

संसद और रिपोर्टों में चेतावनी

जुलाई 2025 में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक unsecured retail loans ₹15.08 लाख करोड़ हो चुके थे. इसमें से ₹2.95 लाख करोड़ क्रेडिट कार्ड बकाया और ₹10.30 लाख करोड़ पर्सनल लोन थे. इसी दौरान डिफॉल्ट्स भी तेजी से बढ़े. मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच क्रेडिट कार्ड का बकाया जो 91 से 360 दिन तक नहीं चुकाया गया, 44% बढ़ गया. यह ₹23,476 करोड़ से बढ़कर ₹33,886 करोड़ पहुंच गया.

क्या बढ़ रहा है सिस्टमिक रिस्क?

RBI की Financial Stability Report जून 2025 में कहा गया कि unsecured loans पर दबाव बढ़ रहा है. क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट्स में बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2024 में जहां Gross NPA ratio 1.84% था, वहीं मार्च 2025 में यह 2.30% हो गया. पर्सनल लोन में भी खराब कर्ज बढ़ा है. हालांकि, अभी RBI ने इसे बैंकिंग सिस्टम के लिए गंभीर खतरा नहीं माना है. दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड लोन अभी भी बैंकिंग सेक्टर की तुलना में छोटे हिस्से में हैं. Economic Survey 2024–25 के मुताबिक, पर्सनल लोन में सबसे बड़ा हिस्सा हाउसिंग और व्हीकल लोन का है.

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. जुलाई 2021 में ₹1.32 लाख करोड़ का क्रेडिट कार्ड कर्ज जुलाई 2025 में बढ़कर ₹2.91 लाख करोड़ हो गया.
  2. देश में क्रेडिट कार्ड की संख्या 6.34 करोड़ से बढ़कर 11.16 करोड़ हो गई, यानी 76% की वृद्धि.
  3. RBI ने EMI पर पारदर्शिता लाने के लिए नियम बदले और जीरो-कॉस्ट EMI पर रोक लगाई.
  4. मार्च 2024 से मार्च 2025 तक क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट्स 44% बढ़कर ₹33,886 करोड़ हो गए.
  5. RBI की रिपोर्ट के मुताबिक दबाव बढ़ रहा है, लेकिन अभी बैंकिंग सिस्टम के लिए बड़ा खतरा नहीं है.
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