झज्जर विधानसभा सीट से 2005 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए हरिराम वाल्मीकि का बीती रात निधन हो गया। 76 वर्षीय वाल्मीकि लंबे समय से विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे। बताया गया है कि उन्होंने रात लगभग एक बजे अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
परिवार के अनुसार, उन्हें पिछले कुछ समय से शुगर, ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी हुई थीं। पिछले सप्ताह से उनकी तबीयत और अधिक बिगड़ने लगी थी। डॉक्टरों की देखरेख में इलाज भी चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
2005 से 2009 तक विधायक रहे थे वाल्मीकि
हरिराम वाल्मीकि ने 2005 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से झज्जर आरक्षित सीट से जीत हासिल की थी। वे 2005 से 2009 तक झज्जर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। उस दौरान वे क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाते रहे और पार्टी के जमीनी नेताओं में गिने जाते थे।
उनकी पहचान एक शांत, सरल और समर्पित जनप्रतिनिधि के रूप में रही। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी उनके मधुर संबंध रहे और पार्टी संगठन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
रात्रि 1 बजे ली अंतिम सांस, आज झज्जर में अंतिम संस्कार
उनके भतीजे डॉक्टर विजय ने जानकारी दी कि वाल्मीकि बीते कुछ दिनों से अपने झज्जर स्थित आवास पर ही विश्राम कर रहे थे। बीमारियों की वजह से वे सार्वजनिक जीवन से दूर थे और चिकित्सकों की सलाह पर घरेलू देखभाल में थे। रात करीब 1 बजे उनका निधन हो गया। परिवार और रिश्तेदारों को सूचित कर दिया गया है और आज झज्जर शहर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर है और स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त करनी शुरू कर दी हैं।

