भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को घोषित सीजफायर के बाद सियासी माहौल गर्म है। कांग्रेस ने इस फैसले में अमेरिका की कथित भूमिका को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह पहली बार है जब अमेरिका जैसे देश की सीधी भूमिका की बात सामने आ रही है और सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई, जिसके कारण यह युद्ध रुका। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत सरकार चुप क्यों है? प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर अब तक इस पर कोई टिप्पणी क्यों नहीं कर रहे?
कश्मीर पर चर्चा केवल भारतीय संसद में हो सकती है: कांग्रेस
जयराम रमेश ने स्पष्ट कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इस पर चर्चा केवल भारतीय संसद में ही हो सकती है। किसी भी विदेशी शक्ति को इस मुद्दे पर मध्यस्थता का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ चल रही कार्रवाई में भारत सरकार और सेना के साथ मजबूती से खड़ी है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है ताकि हालिया पहलगाम आतंकी हमले और सीजफायर पर विस्तृत चर्चा हो सके। इस संबंध में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है।
मोदी सरकार ये बताए कि-
— Congress (@INCIndia) May 14, 2025
• सीजफायर की घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति के माध्यम से क्यों हुई?
• सीजफायर की शर्तें क्या थीं?
• पहलगाम के आतंकवादी कब भारत को सौंपे जाएंगे? क्या ये सीजफायर की शर्तों में शामिल था?
• पाकिस्तान में जो बाकी के आतंकी हैं, जिनको पूरी दुनिया जानती है,… pic.twitter.com/yL0c1Gq1EX
‘इंदिरा होना आसान नहीं’: कांग्रेस का पोस्टर वार
सीजफायर के एक दिन बाद कांग्रेस ने दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगाया जिसमें लिखा था—‘इंदिरा होना आसान नहीं’। इसके साथ 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण की तस्वीरें भी साझा की गईं। संदेश था कि देश को उस निर्णायक नेतृत्व की याद आ रही है, जिसने बिना किसी विदेशी दबाव के सख्त फैसले लिए थे।
सचिन पायलट ने उठाए नए सवाल
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी अमेरिका की भूमिका पर गहन सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर अमेरिका दो दिन पहले कहता है कि उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है, और फिर अचानक सीजफायर की घोषणा वॉशिंगटन से हो जाती है। यह स्थिति कई शंकाओं को जन्म देती है।
पायलट ने केंद्र सरकार से पूछा कि सीजफायर किन शर्तों पर हुआ है? उन्होंने आग्रह किया कि एक और सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें प्रधानमंत्री स्वयं शामिल हों और सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहले हुई दो बैठकों में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति ने भरोसे की कमी पैदा की है।
सीजफायर की पारदर्शिता और राजनीतिक एकजुटता पर जोर
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि देश और विपक्ष को भरोसे में लेना बेहद जरूरी है। सभी दलों ने विचारधारा से ऊपर उठकर सरकार का समर्थन किया था, ऐसे में सरकार की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। सचिन पायलट ने यह भी कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में ऐसे आतंकी हमलों को रोकने के लिए क्या ठोस रणनीति है।

