ईरान के उत्तरी हिस्से में शुक्रवार रातक़रीब 9:20 बजे रिक्टर पैमाने पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। झटका सतह से महज़ 10 किलोमीटर की गहराई पर था, और इसका केंद्र सेमनान शहर से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।
इस झटके के बाद राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में कुछ सेकंड तक कंपन महसूस किया गया। लोग घरों से बाहर निकल आए, लेकिन अब तक किसी जान-माल के नुक़सान की कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है।
भूकंप प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी
रात के वक्त झटका महसूस होने के बाद लोग कुछ देर के लिए सहम गए। सोशल मीडिया पर भी स्थानीय लोगों ने झटके की पुष्टि की। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि स्थिति सामान्य है और कोई बड़ी क्षति रिपोर्ट नहीं हुई है। राहत व बचाव टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
ईरान वैसे भी दुनिया के सबसे भूकंप-प्रवण इलाकों में गिना जाता है। यह देश अल्पाइन-हिमालयन बेल्ट पर स्थित है, जहां अरबियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। यही वजह है कि ईरान में हर साल क़रीब 2,000 से ज़्यादा छोटे-बड़े भूकंप दर्ज होते हैं। इनमें से 15 से 20 झटके तो ऐसे होते हैं जो रिक्टर स्केल पर 5.0 से ऊपर होते हैं।
ईरान-इज़राइल युद्ध की पृष्ठभूमि
यह भूकंप ऐसे वक्त में आया है जब ईरान और इज़राइल के बीच ज़बरदस्त टकराव चल रहा है। कुछ दिन पहले ही इज़राइल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाते हुए अचानक हमला किया था। इसमें ईरान के कई उच्च सैन्य अधिकारी और वैज्ञानिक मारे गए। जवाब में ईरान ने भी मिसाइलों की बारिश कर दी। दोनों तरफ़ से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, और सैकड़ों घायल हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा हो सकता है, क्योंकि कई इलाकों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है और संचार व्यवस्था ठप है।
तेहरान में दहशत का माहौल
तेहरान पहले ही सैन्य तनाव और एयर डिफेंस अलर्ट की स्थिति में है। ऐसे में भूकंप के झटकों ने और चिंता बढ़ा दी है। शहर के कई इलाकों में देर रात कुछ समय के लिए बिजली गुल रही, हालांकि फिर सामान्य आपूर्ति बहाल हो गई।
फ़िलहाल अधिकारियों ने लोगों से अफ़वाहों से दूर रहने और सरकारी सूचना पर ही भरोसा करने की अपील की है। राहत एजेंसियां हालात पर नज़र बनाए हुए हैं।
प्राकृतिक आपदा और सैन्य संकट एक साथ
एक तरफ़ जहां युद्ध के हालात से आम लोग बेहाल हैं, वहीं भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा ने डर और बढ़ा दिया है। राजधानी से लेकर छोटे कस्बों तक, लोग दोहरी चिंता में जी रहे हैं—बमबारी और भूकंप दोनों का ख़ौफ़।
ईरान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने भी बयान जारी कर कहा है कि स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और किसी भी इमरजेंसी के लिए पूरी तैयारी है।
अब यह देखना होगा कि इस प्राकृतिक झटके के बाद राहत कार्यों में कोई अड़चन आती है या नहीं, ख़ासतौर पर ऐसे समय में जब देश की बड़ी हिस्सेदारी सैन्य मोर्चों पर जुटी है।

