ईरान-इजराइल टकराव अपने सातवें दिन में एक खतरनाक मोड़ पर आ पहुंचा है। ईरान के मध्य भाग में स्थित अराक शहर में मौजूद हेवी वॉटर न्यूक्लियर रिएक्टर पर इजराइल ने बड़ा हमला बोला है। शनिवार तड़के इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने अराक और खोंडब शहरों के नागरिकों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। कुछ ही घंटों बाद मिसाइलें रिएक्टर को भेद चुकी थीं। हालांकि अब तक हमले से हुए फिजिकल नुकसान या रेडिएशन रिसाव को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अराक स्थित यह IR-40 हेवी वॉटर रिएक्टर ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है। इस फैसिलिटी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष निगरानी में रहना बताता है कि इसकी सामरिक अहमियत कितनी बड़ी है। सिर्फ ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, यहां हथियारों के निर्माण से जुड़ी गतिविधियां भी लंबे समय से चल रही हैं।
खोंडब भी इजराइली रडार पर
अराक से करीब 40 किलोमीटर दूर खोंडब में मौजूद दूसरा IR-40 रिएक्टर भी इस हमले की रेंज में रहा। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक वहां भी सैन्य कार्रवाई की गई है, हालांकि पूरी स्थिति साफ होने में समय लग सकता है। खोंडब रिएक्टर भी ईरान के न्यूक्लियर इन्फ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा है और पश्चिमी खुफिया एजेंसियां इसे लंबे समय से रेडार पर रखे हुए हैं।
टीवी चैनलों पर इजराइली साइबर हमला
बुधवार देर रात, इजराइली हैकर्स ने ईरान की सरकारी IRIB टीवी समेत कई न्यूज चैनलों को हैक कर लिया। इस साइबर हमले के दौरान टीवी स्क्रीन पर 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दृश्य दिखाए गए, जिनमें महिलाएं अपने बाल काटती नजर आईं। साथ ही, ईरानी जनता से विद्रोह करने की अपील भी प्रसारित की गई।
ये वही दृश्य थे जो महसा अमीनी की मौत के बाद दुनिया भर में वायरल हुए थे। 2022 में 22 वर्षीय महसा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। उस पर गलत तरीके से हिजाब पहनने का आरोप लगा था। उसकी मौत के बाद ईरान में जबरदस्त विरोध भड़का था, जिसने अब एक बार फिर नए रूप में उभार लिया है।
ट्रम्प की योजना: हमला तभी, जब…
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हालांकि, अंतिम आदेश से पहले वे यह देखना चाहते हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटता है या नहीं।
यह संकेत ऐसे वक्त में आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष गहराता जा रहा है। अमेरिका की रणनीति में यह फैसला एक अहम मोड़ बन सकता है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर देखा जा सकता है।
ईरान में मौत का आंकड़ा 639 पहुंचा
वॉशिंगटन स्थित मानवाधिकार समूह ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स’ के मुताबिक, इजराइली हमलों में अब तक ईरान में कम से कम 639 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 263 आम नागरिक और 154 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं।
संगठन का कहना है कि ये आंकड़े देश के भीतर सक्रिय रिपोर्टिंग नेटवर्क के ज़रिए पुष्टि के बाद जारी किए गए हैं। जबकि ईरानी सरकार अब तक हताहतों का कोई नियमित आंकड़ा जारी नहीं कर रही है। सोमवार को जारी पिछली सरकारी रिपोर्ट में केवल 224 मौतों की बात कही गई थी।
इजराइल में युद्ध के पक्ष में बहुमत
चैनल 13 न्यूज के हालिया सर्वे के मुताबिक, इजराइली नागरिकों में 75% लोग मौजूदा युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, 17% इससे असहमति जताते हैं। 64% लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह युद्ध ईरान के परमाणु खतरे से निपटने के लिए शुरू किया, जबकि 28% इसे घरेलू राजनीतिक लाभ से जोड़ते हैं।
इसी सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलने का अनुमान है—पिछले सप्ताह की तुलना में 3 सीटों की बढ़त। हालांकि, उनका गठबंधन अब भी संसद में 61 सीटों के बहुमत से पीछे है, फिलहाल उसे 50 सीटें मिलती दिख रही हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी को नुकसान हुआ है। पिछले हफ्ते जहां उन्हें 27 सीटें मिल रही थीं, अब यह घटकर 24 रह गई हैं।
अमेरिका में भी राय बंटी हुई
फॉक्स न्यूज के सर्वे में सामने आया है कि अमेरिका में ईरान पर हमले को लेकर जनता दो हिस्सों में बंटी है। 49% लोग हमले का समर्थन करते हैं, जबकि 46% विरोध में हैं। रिपब्लिकन मतदाताओं में 73% इसे सही मानते हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स और स्वतंत्र मतदाताओं में यह संख्या सिर्फ 32% है।
इसके अलावा, 73% अमेरिकियों का मानना है कि ईरान अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा है। वहीं, 59% को लगता है कि ईरान पर हमला दुनिया को और खतरनाक बना देगा। बावजूद इसके, 53% लोग इजराइली सेना को आर्थिक सहायता देने के पक्ष में हैं।
यह सर्वे 1,003 पंजीकृत अमेरिकी मतदाताओं के बीच कराया गया था, जिससे यह साफ होता है कि पश्चिम एशिया में बढ़ती अशांति ने अमेरिकी राजनीति और जनमानस में भी हलचल पैदा कर दी है।

