नेपाल में ‘Gen Z आंदोलन’ के दबाव के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही कई मंत्री और सांसदों ने भी पद छोड़ दिया। हालात ऐसे बन गए हैं कि राष्ट्रपति ने भी इस्तीफा दे दिया। खबर है कि ओली और उनके करीबी नेता देश छोड़कर भागने की तैयारी में हैं। यह स्थिति उस दौर की याद दिलाती है जब पड़ोसी देशों के कई शीर्ष नेताओं को सरकार गिरने के बाद सुरक्षा कारणों से देश छोड़ना पड़ा था। इनमें बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और थाईलैंड के नेता शामिल रहे हैं।
नेपाल में ओली सरकार का पतन
नेपाल में लंबे समय से चले आ रहे छात्र और युवा आंदोलन ने आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी छीन ली। उनके इस्तीफे के बाद मंत्रियों और सांसदों ने भी पद छोड़ा, जिससे सरकार पूरी तरह ध्वस्त हो गई। राष्ट्रपति ने भी इस्तीफा देकर इस संकट को और गहरा कर दिया। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ओली और उनके सहयोगी नेता सुरक्षा कारणों से देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। नेपाल का यह संकट अब क्षेत्रीय राजनीति के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है।
बांग्लादेश की शेख हसीना का पलायन
नेपाल की मौजूदा स्थिति को बांग्लादेश के हालात से जोड़ा जा रहा है। 2024 में वहां छात्रों के बड़े आंदोलन ने शेख हसीना की पांच बार चली आ रही सरकार को गिरा दिया था। प्रदर्शनकारियों ने ढाका स्थित सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया और शेख हसीना को भागना पड़ा। इसे बांग्लादेश में दूसरा स्वतंत्रता संग्राम कहा गया। हसीना ने 15 साल से ज्यादा देश पर शासन किया था, लेकिन जब गुस्सा चरम पर पहुंचा, तो उन्हें भी देश छोड़ना पड़ा।
श्रीलंका में गोटबाया राजपक्षे का पतन
जुलाई 2022 में श्रीलंका में भी हालात बेकाबू हो गए थे। आर्थिक संकट इतना गंभीर हो गया कि जनता ने राष्ट्रपति भवन और संसद तक पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को पहले मालदीव और फिर सिंगापुर भागना पड़ा। बाद में वे थाईलैंड गए और कुछ महीनों बाद वापस लौटे। हालांकि अदालत ने उन्हें आर्थिक कुप्रबंधन का दोषी ठहराया, लेकिन शुरुआत में वे लंबे समय तक निर्वासन में रहे। यह घटना भी दिखाती है कि बड़े जन आंदोलनों से सत्ता कैसे पलट जाती है।
अशरफ गनी और अफगानिस्तान का हाल
अगस्त 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो राष्ट्रपति अशरफ गनी के पास भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। वे पहले ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान गए और फिर संयुक्त अरब अमीरात में शरण ली। उनका पलायन दिखाता है कि अचानक हुए राजनीतिक बदलाव नेताओं को कितना मजबूर कर सकते हैं। गनी का जाना अफगानिस्तान के नए अध्याय की शुरुआत साबित हुआ।
पाकिस्तान और थाईलैंड के नेता भी हुए निर्वासित
पाकिस्तान में कई नेता सत्ता छूटने के बाद देश छोड़कर भागे। 2008 में परवेज मुशर्रफ इस्तीफे के बाद ब्रिटेन चले गए। नवाज शरीफ को 1999 में सत्ता से हटाकर सऊदी अरब भेजा गया, बाद में वे वापस लौटे। बेनजीर भुट्टो भी आठ साल तक निर्वासन में रहीं और 2007 में लौटने पर उनकी हत्या हो गई। थाईलैंड की यिंगलक शिनवात्रा को भी 2014 में तख्तापलट के बाद ब्रिटेन भागना पड़ा। इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक अस्थिरता में नेताओं के लिए देश में रहना मुश्किल हो जाता है।

- नेपाल में ‘Gen Z आंदोलन’ के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया।
- मंत्रियों और सांसदों के साथ राष्ट्रपति ने भी पद छोड़ दिया।
- खबर है कि ओली और उनके सहयोगी देश छोड़ने की तैयारी में हैं।
- इससे पहले बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के नेता भी भाग चुके हैं।
- राजनीतिक संकट में नेपाल अब एशिया की राजनीति का नया केंद्र बन गया है।

