रविवार, मई 3, 2026
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NATO की धमकी: भारत-चीन ने रूस से व्यापार नहीं रोका तो लगेगा 100% टैरिफ, ट्रम्प ने भी दी सख्त चेतावनी

नाटो महासचिव मार्क रूट ने भारत, चीन और ब्राज़ील को सख्त लहजे में चेताया है कि अगर इन देशों ने रूस से तेल और गैस का व्यापार जारी रखा, तो उन्हें 100% टैरिफ और सेकेंडरी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। बुधवार को अमेरिकी सीनेटरों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए रूट ने साफ कहा कि इन देशों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि वह यूक्रेन युद्ध को रोकें और शांति वार्ता को गंभीरता से लें।

रूट ने कहा, “अगर आप भारत के प्रधानमंत्री, चीन के राष्ट्रपति या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं, तो आपको समझना होगा कि रूस के साथ व्यापार जारी रखना अब सुरक्षित नहीं है। इससे बड़ा नुकसान हो सकता है।”

सेकेंडरी प्रतिबंधों का संकेत, वैश्विक दबाव तेज

नाटो महासचिव ने इन तीन देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की भी बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर रूस के साथ व्यापार जारी रहता है, तो उन देशों और कंपनियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो प्रतिबंधित रूस के साथ कारोबार कर रही हैं।

सेकेंडरी प्रतिबंध का मतलब है कि अमेरिका जैसे देश सीधे प्रतिबंधित देश पर नहीं, बल्कि उस देश से व्यापार करने वाली कंपनियों या देशों पर कार्रवाई करते हैं। इसका असर वैश्विक वित्तीय लेन-देन, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है।

रूस ने नाटो की धमकियों को किया खारिज

दूसरी ओर, रूस ने इन धमकियों को सिरे से नकार दिया है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने कहा कि उनका देश अमेरिका या नाटो के किसी भी अल्टीमेटम को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “रूस किसी भी तरह के दबाव में अपनी नीतियां नहीं बदलेगा। हम दूसरे व्यापारिक रास्तों पर काम कर रहे हैं।”

रियाबकोव ने यह भी कहा कि रूस अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह बातचीत किसी तरह की धमकी या शर्तों के साथ नहीं हो सकती।

अमेरिका देगा यूक्रेन को एडवांस हथियार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल जैसे आधुनिक हथियार देने की घोषणा की है, ताकि वह रूस के हमलों का मुकाबला कर सके। इस कदम को रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

ट्रम्प प्रशासन ने साफ किया है कि अगर रूस ने जल्द युद्ध नहीं रोका तो उसके व्यापारिक साझेदारों को भी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका का रुख साफ है – जो देश रूस का साथ देंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर दिया जाएगा।

दो दिन पहले ट्रम्प ने दी थी टैरिफ की चेतावनी

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दो दिन पहले रूस पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर रूस ने 50 दिनों के भीतर यूक्रेन के साथ शांति वार्ता नहीं की, तो उस पर भारी व्यापारिक प्रतिबंध लागू होंगे। ट्रम्प ने यह भी साफ किया था कि यह सेकेंडरी टैरिफ होगा, यानी जो देश रूस से तेल खरीद रहे हैं – जैसे भारत और चीन – उन पर भी प्रभाव पड़ेगा।

सेकेंडरी प्रतिबंध क्या होते हैं?

सेकेंडरी प्रतिबंध उन देशों या कंपनियों पर लगाए जाते हैं जो किसी पहले से प्रतिबंधित देश के साथ व्यापार करते हैं। जैसे, अगर अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाया है और भारत की कोई कंपनी रूस से तेल खरीदती है, तो अमेरिका उस भारतीय कंपनी पर भी कार्रवाई कर सकता है।

इसमें कंपनी को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम से निकालना, उस पर जुर्माना लगाना या फिर उसके साथ व्यापारिक संबंध तोड़ना शामिल हो सकता है। यही वजह है कि अधिकांश देश ऐसे व्यापार से बचना पसंद करते हैं।

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