रविवार, मई 3, 2026
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अनुच्छेद 370 से नोटबंदी तक.. चीफ जस्टिस गवई के बड़े फैसलों ने भारतीय न्यायपालिका में रचा इतिहास

जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शपथ दिलाई। वे पूर्व CJI जस्टिस संजीव खन्ना का स्थान ले रहे हैं, जो मंगलवार को 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हुए। जस्टिस गवई न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन के बाद दलित समुदाय से आने वाले दूसरे CJI हैं।

महाराष्ट्र के अमरावती में जन्मे जस्टिस गवई का कार्यकाल करीब छह महीने का होगा, जो 23 नवंबर 2025 तक चलेगा। उन्हें 2019 में सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

370, नोटबंदी और चुनावी बॉन्ड

अपने अब तक के कार्यकाल में जस्टिस गवई कई ऐतिहासिक मामलों का हिस्सा रहे हैं। वे संविधान पीठ में शामिल रहे, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले को सर्वसम्मति से बरकरार रखा।

चुनावी बॉन्ड की वैधता पर फैसला देने वाली पांच जजों की पीठ में भी वे शामिल रहे, जिसने इस योजना को खारिज करते हुए राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता पर जोर दिया।

नोटबंदी को लेकर केंद्र के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाले केस में, वे उस बेंच में थे जिसने 4:1 के बहुमत से नोटबंदी को सही ठहराया।

‘असंवेदनशील टिप्पणियों’ के खिलाफ कड़ा रुख

जस्टिस गवई की अगुवाई वाली बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की उस विवादास्पद टिप्पणी पर रोक लगाई जिसमें महिला के साथ की गई ज़्यादती को “बलात्कार का प्रयास नहीं” माना गया था। उन्होंने इस टिप्पणी को “असंवेदनशील और अमानवीय” करार देते हुए उसे खारिज किया।

दलितों में उप-श्रेणियों को संवैधानिक मान्यता

जस्टिस गवई सात जजों की उस बेंच का भी हिस्सा रहे, जिसने फैसला सुनाया कि राज्य सरकारें अनुसूचित जातियों के भीतर उप-श्रेणियों को मान्यता दे सकती हैं। यह निर्णय दलित समुदाय के भीतर सबसे वंचित वर्गों को लक्षित कल्याण देने की दिशा में अहम कदम माना गया।

‘बुलडोजर न्याय’ के खिलाफ संवैधानिक संतुलन की बात

विध्वंस की कार्यवाहियों में बिना नोटिस की कार्रवाई पर भी जस्टिस गवई ने निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि संविधान की मर्यादा सबसे ऊपर है और प्रशासनिक कार्यवाहियों में भी इसकी रक्षा होनी चाहिए।

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  • जस्टिस बी.आर. गवई ने 52वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, वे दलित समुदाय से दूसरे CJI हैं।
  • वे सुप्रीम कोर्ट की उन बेंचों का हिस्सा रहे जिन्होंने अनुच्छेद 370, नोटबंदी और चुनावी बॉन्ड जैसे ऐतिहासिक फैसले दिए।
  • उन्होंने अदालतों की असंवेदनशील टिप्पणियों पर भी सख्त रुख अपनाया और ‘बुलडोजर न्याय’ के विरुद्ध निष्पक्ष प्रक्रिया पर जोर दिया।
  • जस्टिस गवई ने संविधान में अनुसूचित जातियों की उप-श्रेणियों को मान्यता देने वाले फैसले में भी निर्णायक भूमिका निभाई।
  • उन्होंने अब तक लगभग 300 फैसले लिखे हैं और 700 से अधिक बेंचों में शामिल रहे हैं।
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