Friday, July 17, 2026
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अब धरती का हर कोना दिखेगा: ISRO-NASA का ‘NISAR’ लॉन्च, बादल-अंधेरे-जंगल सब पार, 97 मिनट में पूरी पृथ्वी का चक्कर

भारत और अमेरिका की स्पेस एजेंसियों ISRO और NASA ने मिलकर अब तक का सबसे ताकतवर और महंगा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ‘NISAR’ लॉन्च कर दिया है। इसे 30 जुलाई की शाम श्रीहरिकोटा से GSLV-F16 रॉकेट के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजा गया। निसार सैटेलाइट बादलों, घने जंगलों और अंधेरे में भी धरती की निगरानी करने में सक्षम है। ये मिशन जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय बदलावों की सटीक जानकारी देगा। 12,500 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सैटेलाइट में पहली बार दो देशों की टेक्नोलॉजी एक साथ इस्तेमाल की गई है। निसार 97 मिनट में पूरी धरती का एक चक्कर लगाता है और 12 दिन में हर इंच की तस्वीरें ले लेता है।

निसार सैटेलाइट क्या है और कैसे काम करता है

NASA और ISRO ने मिलकर तैयार किया गया ‘निसार’ (NISAR) सैटेलाइट अब तक का सबसे ताकतवर अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन है। इसका मकसद है धरती की सतह पर हो रहे छोटे से छोटे बदलाव को पकड़ना, चाहे वो जमीन का धंसना हो या बर्फ का पिघलना। निसार में लगा 12 मीटर का गोल्ड प्लेटेड रडार एंटीना धरती की तस्वीरें हर मौसम में, दिन-रात, अंधेरे या धुएं के बावजूद भी ले सकता है। ये L-बैंड और S-बैंड नाम की दो टेक्नोलॉजी से लैस है, जो जमीन के अंदर और सतह दोनों की सटीक जानकारी देती है।

निसार क्यों है खास

पारंपरिक सैटेलाइट्स मौसम की रुकावटों की वजह से सही जानकारी नहीं दे पाते। निसार इस कमी को पूरा करता है। ये हर 97 मिनट में धरती का चक्कर लगाता है और हर 12 दिन में पूरी पृथ्वी को स्कैन कर लेता है। इसका डेटा ओपन-सोर्स होगा, यानी दुनियाभर के वैज्ञानिक इसे मुफ्त में इस्तेमाल कर सकेंगे।

निसार मिशन के चार मुख्य चरण

इस मिशन को चार हिस्सों में बांटा गया है – लॉन्च, डिप्लॉयमेंट, कमीशनिंग और साइंस ऑपरेशन। शुरुआत में इसे GSLV-F16 रॉकेट से भेजा गया। फिर अंतरिक्ष में इसका रडार एंटीना खोला गया। इसके बाद सिस्टम की टेस्टिंग होगी और आखिर में ये धरती पर निगरानी शुरू करेगा।

क्या-क्या देखेगा निसार

यह मिशन खास तौर पर तीन क्षेत्रों पर फोकस करेगा – जमीन और बर्फ के बदलाव, पारिस्थितिक तंत्र (जैसे जंगल और खेती), और समुद्री गतिविधियां। इससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं को पहले से समझा जा सकेगा।

पहली बार क्या हुआ

ये पहला मौका है जब GSLV रॉकेट से किसी सैटेलाइट को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजा गया है। निसार पोलर ऑर्बिट में 747 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है। यह तकनीक ISRO और NASA की मिलीजुली ताकत का बड़ा उदाहरण है।

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  1. लॉन्च डेट: 30 जुलाई को शाम 5:40 बजे निसार को GSLV-F16 रॉकेट से श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया।
  2. कॉस्ट और तकनीक: इस पर 12,500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, NASA का L-बैंड और ISRO का S-बैंड रडार तकनीक इस्तेमाल हुई है।
  3. ऑर्बिट डिटेल्स: सैटेलाइट 747 किमी की ऊंचाई पर पोलर ऑर्बिट में 97 मिनट में धरती का एक चक्कर लगाएगा।
  4. देखने की क्षमता: निसार अंधेरे, बादल, जंगल और धुएं के अंदर तक देख सकता है और सेंटीमीटर स्तर के बदलाव ट्रैक कर सकता है।
  5. मिशन उद्देश्य: जमीन, बर्फ, पारिस्थितिक तंत्र और समुद्र के बदलावों की निगरानी कर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय जोखिमों को समझने में मदद करेगा।
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