श्रीनगर के लिडवास जंगलों में भारतीय सेना ने एक बड़े ऑपरेशन में तीन आतंकियों को ढेर कर दिया है, जो अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के गुनहगार थे। यह ऑपरेशन ‘महादेव’ नाम से चलाया गया और करीब 96 दिन बाद सेना को इन आतंकियों के मूवमेंट का सुराग मिला। इसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर रणनीति बनाई और 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया। मारे गए आतंकियों में पहलगाम और सोनमर्ग हमलों का मास्टरमाइंड अबू सुलैमान उर्फ हाशिम मूसा भी शामिल था।
ऑपरेशन की शुरूआत
सेना को एक सैटेलाइट फोन की एक्टिविटी से पता चला कि आतंकियों की हलचल लिडवास के जंगलों में हो रही है। इसके बाद 24 राष्ट्रीय रायफल, 4 पैरा कमांडो, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की टीमों ने इलाके में घेराबंदी कर दी। 28 जुलाई की सुबह 11:30 बजे जंगल में एक टेंट नजर आया, जिसमें आतंकी सो रहे थे। सेना ने बिना वक्त गंवाए हमला किया और आतंकियों को कोई मौका नहीं मिला।
कैसे मिला सुराग
दरअसल, 11 जुलाई को बाइसरन इलाके में एक चीनी सैटेलाइट फोन एक्टिव हुआ था। यही सुराग बना ऑपरेशन की नींव। सेना ने खानाबदोशों और लोकल इन्फॉर्मेशन नेटवर्क से भी इनपुट लिया कि इलाके में बाहरी संदिग्ध देखे गए हैं। फिर दो दिन पहले घेराबंदी की गई और ऑपरेशन को गुप्त तरीके से अंजाम दिया गया।
कौन थे मारे गए आतंकी
सेना के मुताबिक, मारे गए तीनों आतंकी TRF (The Resistance Front) से जुड़े थे, जो लश्कर-ए-तैयबा की सहयोगी शाखा है। इनमें अबू सुलैमान वही शख्स है, जिसने पहलगाम और सोनमर्ग हमले की साजिश रची थी। उसने पहचान छुपाने के लिए वजन तक कम कर लिया था। बाकी दो आतंकियों की पहचान यासिर और हामजा के तौर पर की जा रही है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
क्या-क्या मिला आतंकियों से
मुठभेड़ के बाद इलाके की तलाशी में आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। इनमें एक AK-47 राइफल, एक M4 अमेरिकी कार्बाइन, कई हैंड ग्रेनेड, एक IED और पुराना सैटेलाइट फोन शामिल हैं। ये सारे सबूत इस बात की तस्दीक करते हैं कि आतंकी किसी बड़े हमले की फिराक में थे।
पहलगाम हमला क्यों था इतना खतरनाक
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बाइसरन घाटी में हुए हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। आतंकियों ने नाम पूछकर लोगों को लाइन में खड़ा किया और जो इस्लामिक आयत नहीं पढ़ सके, उन्हें गोलियों से भून दिया गया। इस बर्बर हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन सिंदूर चलाया और अब ऑपरेशन महादेव के जरिए तीनों मुख्य गुनहगारों का खात्मा कर दिया गया।

- ऑपरेशन महादेव के तहत लिडवास जंगलों में तीन आतंकियों को मार गिराया गया, जो पहलगाम हमले में शामिल थे।
- अबू सुलैमान उर्फ हाशिम मूसा की पहचान हुई, बाकी दो आतंकी यासिर और हामजा हो सकते हैं।
- ऑपरेशन 28 जुलाई को शुरू हुआ, सैटेलाइट फोन की एक्टिविटी से मिला सुराग।
- आतंकियों के पास से AK-47, M4 कार्बाइन, IED और ग्रेनेड मिले।
- पहलगाम हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे, अब सेना ने मुख्य गुनहगारों को ढेर कर बदला लिया।

