शनिवार, मई 2, 2026
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देहरादून में शनिवार की सुबह रही योग के नाम, राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा- योग अब पूरी दुनिया की विरासत है

शनिवार की सुबह देहरादून की फिज़ा कुछ अलग थी। हवा में हल्की नमी थी, लेकिन मैदान में मौजूद हर शख्स के चेहरे पर ताज़गी। मौका था 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का, और खास बात ये रही कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु खुद इस मौके पर देहरादून पहुंचीं।

कार्यक्रम में उनका आना महज एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि उनका संबोधन और उपस्थिति ने पूरे आयोजन को एक अलग ही ऊर्जा दी। राष्ट्रपति ने सबसे पहले योग दिवस की बधाई दी और फिर कहा- “योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं, ये जुड़ने की प्रक्रिया है। खुद से, और दूसरों से भी।”

“एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” की बात

इस बार की थीम—‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’—का ज़िक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि योग से न सिर्फ शरीर बल्कि मन और आत्मा को भी संतुलित किया जा सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि 2015 से लेकर अब तक दुनियाभर में योग का जो प्रभाव बढ़ा है, वो अपने आप में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है।

उनके शब्दों में थोड़ा ठहराव था, लेकिन भाव गहराई से भरे हुए। उन्होंने कहा, “हमारे प्रयासों से योग अब मानवता की साझा धरोहर बन गया है। यह अब किसी एक देश या धर्म तक सीमित नहीं रहा।”

“योग किसी पंथ से नहीं जुड़ा”

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने भाषण में एक ज़रूरी बात पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ लोग आज भी योग को किसी विशेष समुदाय से जोड़ते हैं। ये भ्रांति है। योग किसी पंथ या धर्म की चीज़ नहीं। यह एक जीवन शैली है, जो हर किसी के लिए है—चाहे उसकी जाति, भाषा, रंग या मज़हब कुछ भी हो।”

उनका यह कहना, शायद उन तमाम लोगों के लिए सीधा संदेश था जो योग के सामाजिक दायरे को सीमित मानते हैं।

देशभर में मनाया गया योग दिवस

देहरादून का आयोजन तो मुख्य आकर्षण रहा, लेकिन देश के कोने-कोने में आज सुबह योग के साथ शुरू हुई। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, कई शहरों में मैदान भरे हुए थे। कहीं गंगा के घाटों पर लोग योगासन करते दिखे, तो कहीं स्कूलों और कार्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास हुआ।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस मौके पर ‘एक्स’ पर अपना संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा—“भारत का ये उपहार आज लाखों लोगों के जीवन में बदलाव ला रहा है। योग एक शक्ति है, जो सीमाओं से परे जाकर जोड़ती है।”

साधारण दिन नहीं था आज

हर साल की तरह ये 21 जून भी शायद गुजर जाएगा, लेकिन देहरादून की इस सुबह ने ये साफ़ कर दिया कि योग अब किसी आंदोलन से ज़्यादा एक साझा एहसास बन चुका है। और जब राष्ट्रपति खुद एक कार्यक्रम में शामिल होकर योग को इतना मान देती हैं—तो ये एक संकेत है, कि देश अब अपने प्राचीन ज्ञान को नए विश्वास के साथ अपना रहा है।

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भाग लिया।
  • अपने संबोधन में उन्होंने “योग का अर्थ जोड़ना है” कहते हुए इसे मानवता की साझा धरोहर बताया।
  • इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ रखी गई, जिसे राष्ट्रपति ने वैश्विक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि योग किसी धर्म या संप्रदाय से नहीं जुड़ा, बल्कि यह एक समग्र जीवनशैली है।
  • उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और देशभर के नागरिकों ने भी अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक योग में भाग लिया।
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