ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर की फिल्म ‘वॉर 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में आ चुकी है। यह फिल्म पहली ‘वॉर’ की कहानी को आगे बढ़ाती है। कबीर (ऋतिक रोशन) अब RAW छोड़कर एक मर्सनेरी बन चुका है, जो पैसों के लिए किसी का भी खात्मा कर देता है। एक मिशन के दौरान वह जापानी माफिया से भिड़ता है, और यहीं से कहानी रोमांचक मोड़ लेती है।
कलि कार्टेल का खतरा और कबीर का मिशन
कबीर की मुलाकात कलि कार्टेल से होती है, जो भारत समेत कई देशों के ताकतवर लोगों का अवैध नेटवर्क है। उनका नया निशाना भारत है और वे कबीर की मदद से इसे हासिल करना चाहते हैं। लेकिन कबीर का असली मकसद इस गैंग को खत्म करना है। यहीं उसकी टक्कर अपने पुराने दोस्त और अब दुश्मन मेजर विक्रम जलपति (जूनियर एनटीआर) से होती है।
दोस्ती से दुश्मनी तक की टक्कर
कबीर और विक्रम के बीच मुकाबला फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है। कार चेज से लेकर ट्रेन, प्लेन और जेट स्की तक एक्शन सीक्वेंस दमदार हैं। लेकिन इनकी लंबाई दर्शकों को थका देती है।
सेकेंड हाफ में कहानी का धीमा पड़ना
फर्स्ट हाफ में कहानी टाइट और रोमांचक है, लेकिन सेकेंड हाफ में कई फ्लैशबैक और लंबे इमोशनल सीन फिल्म की रफ्तार कम कर देते हैं। कुछ सरप्राइज मोमेंट्स हैं, मगर वे जल्द ही फीके पड़ जाते हैं।
एक्टिंग और तकनीकी पहलू
ऋतिक रोशन अपने एक्शन और स्वैग से पूरी फिल्म में छाए रहते हैं। जूनियर एनटीआर ने भी दमदार अभिनय किया, लेकिन उन पर इस्तेमाल हुए VFX ने असर कम किया। कियारा आडवाणी पहली बार एक्शन अवतार में दिखी हैं और अच्छा काम किया, हालांकि स्क्रीन टाइम कम रहा। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है, मगर एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी।

- ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर की जबरदस्त एक्शन के साथ स्टार पावर।
- कहानी पहली ‘वॉर’ से आगे बढ़ती है, जिसमें कलि कार्टेल का खतरा दिखाया गया।
- कार, ट्रेन, प्लेन और जेट स्की पर फिल्माए गए हाई-ऑक्टेन एक्शन सीन।
- सेकेंड हाफ में धीमी रफ्तार और लंबे इमोशनल सीक्वेंस ने फिल्म को कमजोर किया।
- सिनेमैटोग्राफी बेहतरीन, लेकिन एडिटिंग और VFX में सुधार की जरूरत।

