पंजाब की ओर से भाखड़ा नहर का पानी रोकने के विवाद को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज चंडीगढ़ में ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है, जिसका उद्देश्य पानी संकट पर राजनीतिक सहमति बनाना है। वहीं, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने शाम 5 बजे चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया है, जिसमें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और राजस्थान के अधिकारियों को बुलाया गया है। हालांकि, कल दिल्ली में हुई दो मीटिंगों के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
इस बीच हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है। इसके लिए दिल्ली में अधिकारियों से याचिका का ड्राफ्ट तैयार कराया जा रहा है।
हरियाणा में बढ़ता पानी संकट
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा के 9 जिलों में पानी की गंभीर कमी महसूस हो रही है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो दिल्ली और राजस्थान को पानी की आपूर्ति में कटौती हो सकती है, क्योंकि इन दोनों राज्यों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति हरियाणा से होती है।
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की पहल
वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मामले को लेकर एक ऑल पार्टी मीटिंग की। बैठक में सभी पार्टियों ने पंजाब सरकार के फैसले का समर्थन किया और राजनीति से ऊपर उठकर पानी के मसले पर एकजुट होने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बैठक के बाद बताया कि प्रधानमंत्री से मिलने का सुझाव आया है और इस मुद्दे पर विधानसभा में 5 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
दिल्ली में हुई बेनतीजा बैठकें
पानी के विवाद को सुलझाने के लिए दिल्ली में दो दौर की बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन इनमें कोई समाधान नहीं निकल पाया। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की बैठक में पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के अधिकारियों से यह कहा गया कि वे अपनी जिद छोड़ें। हरियाणा को पानी की जरूरत को लेकर BBMB के पास तर्क पेश करने का निर्देश भी दिया गया। दूसरी मीटिंग में भी दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई, जिससे मामला और पेचिदा हो गया है।
पानी की आपूर्ति पर पंजाब और हरियाणा के बीच तनाव
पंजाब और हरियाणा के बीच पानी का यह विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है, जिसमें दोनों राज्य अपने-अपने अधिकारों को लेकर अड़े हुए हैं। पंजाब ने केवल 4,000 क्यूसेक पानी देने की बात की है, जबकि हरियाणा की मांग 8,500 क्यूसेक पानी की है। इस विवाद को सुलझाने के लिए अब BBMB की ओर से जल्द नई बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।

