राजस्थान के बाड़मेर जिले के हरसाणी गांव की नींद एक चीख ने तोड़ी, जब एक 8 साल की बच्ची ने अपनी मां को खून से सनी चारपाई पर देखा। उसकी चीख से गांव में हड़कंप मच गया और जल्दी ही यह खुलासा हुआ कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या थी — जिसे खुद महिला के पति ने अंजाम दिया।
तीन महीने से रख रहा था पत्नी पर नजर
पुलिस जांच में सामने आया कि रहमत नाम की महिला की हत्या उसके ही पति मोइम ने की। हत्या अचानक नहीं, बल्कि महीनों की अंदरूनी उथल-पुथल और संदेह की उपज थी। करीब तीन महीने पहले मोइम ने रहमत को देर रात किसी से फोन पर बात करते देखा। जब उसने पूछताछ की तो जवाब मिला — “रिश्तेदार हैं।” लेकिन इस जवाब ने उसके अंदर शक का बीज बो दिया।
मोइम ने मजदूरी छोड़ दी, घर में रहकर पत्नी की हर गतिविधि पर नजर रखने लगा। एक दिन घर के बाहर किसी पुरुष के जूतों के निशान देखकर उसका शक और पुख्ता हो गया। तभी से वह रहमत को डराने और जवाब निकलवाने के इरादे से कुल्हाड़ी दिखाने लगा, पर कोई साफ जवाब न मिला।
साजिश के लिए खरीदी गई थी सिरोही की तलवार
30 जून को मोइम ने माउंट आबू जाने का बहाना बनाया और लौटते समय सिरोही से एक धारदार तलवार खरीद ली। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह तलवार डराने के लिए लाया था, लेकिन यही हथियार रहमत की जान लेने का जरिया बन गया।
तीन बजे रात को किया हमला
घटना की रात यानी 10 जुलाई को दोनों के बीच फिर से झगड़ा हुआ। रहमत ने फिर वही जवाब दोहराया — “रिश्तेदार से बात कर रही थी।” लेकिन उस रात मोइम का गुस्सा हदें पार कर गया। रात लगभग तीन बजे जब रहमत सो रही थी, तब मोइम ने तलवार से उसका गला काट डाला।
सुबह उनकी बेटी ने मां को खून से लथपथ देखा और पड़ोसियों को आवाज दी। गांव में सनसनी फैल गई और पुलिस को खबर दी गई।
हत्या के बाद जोधपुर भागने की कोशिश
हत्या को अंजाम देने के बाद मोइम जोधपुर भागने की फिराक में था। लेकिन शिव के पास बस से जाते समय उसे पुलिस ने धर दबोचा। पूछताछ में उसने हत्या से पहले की हर घटना विस्तार से कबूल की।
मानसिक स्थिति भी बनी वजह
परिजनों के मुताबिक, मोइम के सिर में साल 2012 में गंभीर चोट लगी थी, जिसका इलाज उसने बीच में ही छोड़ दिया। इसके बाद से वह छोटी-छोटी बातों पर संदेह करने लगा था। रहमत की हत्या के मामले में पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

