भारत ने इंग्लैंड में चल रही वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो दिनों में दो गोल्ड अपने नाम किए. रविवार को मीनाक्षी ने 48 किलोग्राम वेट कैटेगरी के फाइनल में कजाकिस्तान की तीन बार की विश्व विजेता नजिम काईजीबे को 4-1 से हराया. इससे पहले जैस्मिन लंबोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग में पोलैंड की जूलिया स्जेरेमेटा को हराकर गोल्ड जीता. इन जीतों के साथ भारत ने मौजूदा सीजन में कुल चार मेडल हासिल कर लिए हैं, जिनमें एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज भी शामिल है.
मीनाक्षी की ऐतिहासिक जीत
मीनाक्षी ने रविवार को हुए फाइनल में कजाकिस्तान की नजिम काईजीबे को 48 किलोग्राम वेट कैटेगरी में हराकर इतिहास रच दिया. काईजीबे तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और पेरिस ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट रह चुकी हैं. मीनाक्षी ने रणनीतिक अंदाज में खेलते हुए बैकफुट पर रहते हुए सीधे पंचों का फायदा उठाया और प्रतिद्वंद्वी को मात दी. इस जीत से मीनाक्षी भारत की 10वीं महिला मुक्केबाज बन गईं, जिन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम पन्ना जोड़ दिया.
जैस्मिन की शानदार वापसी
मीनाक्षी से पहले शनिवार को जैस्मिन लंबोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में पोलैंड की जूलिया स्जेरेमेटा को 4-1 से मात दी. जैस्मिन ने पहला राउंड हारने के बाद जबरदस्त वापसी की और मैच पर अपना पूरा नियंत्रण बना लिया. उनके अटैक और डिफेंस का संतुलन इतना शानदार था कि जजों का फैसला उनके पक्ष में गया. जीत के बाद जैस्मिन ने कहा कि यह खुशी शब्दों में बयान नहीं की जा सकती. पेरिस ओलिंपिक में शुरुआती हार के बाद उन्होंने खुद को तैयार किया और अब मेहनत रंग लाई.
भारत की मेडल टैली
मौजूदा वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत अब तक चार मेडल जीत चुका है. इनमें दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल हैं. मीनाक्षी की जीत से भारत को विमेंस कैटेगरी का 16वां गोल्ड मिला है. इसके अलावा भारत के खाते में 9 सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज पहले से दर्ज हैं. इस बार नूपुर 80 किलोग्राम के फाइनल में हार गईं, जबकि पूजा रानी को ब्रॉन्ज से संतोष करना पड़ा. यह सफलता दिखाती है कि महिला बॉक्सिंग में भारत की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है और नए सितारे सामने आ रहे हैं.
पुरुष वर्ग की निराशा
जहां महिला मुक्केबाजों ने कमाल दिखाया, वहीं पुरुष वर्ग के लिए यह टूर्नामेंट निराशाजनक रहा. भारत का 10 सदस्यीय पुरुष दल एक भी मेडल जीतने में नाकाम रहा. 2013 के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय पुरुष बॉक्सर खाली हाथ लौटे हैं. 50 किलोग्राम वर्ग में जादुमणि सिंह ने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन कजाकिस्तान के खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी लेकिन 0-4 से हार गए. अभिनाश जमवाल भी क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे, मगर बाकी खिलाड़ी शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ सके.
पिछले साल की तुलना
पिछले साल ताशकंद में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय पुरुष बॉक्सरों ने तीन ब्रॉन्ज मेडल जीते थे. उस समय दीपक भोरिया, मोहम्मद हुसामुद्दीन और निशांत देव ने देश को मेडल दिलाया था. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया. महिला मुक्केबाजों की कामयाबी ने जरूर इस कमी को पूरा किया और भारत का नाम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा किया. इन जीतों ने यह साफ कर दिया है कि महिला बॉक्सिंग में भारत का भविष्य उज्ज्वल है और नई पीढ़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है.

- भारत ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो दिन में दो गोल्ड अपने नाम किए.
- मीनाक्षी ने कजाकिस्तान की तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन नजिम काईजीबे को 4-1 से हराया.
- जैस्मिन लंबोरिया ने पोलैंड की जूलिया स्जेरेमेटा को हराकर गोल्ड जीता.
- भारत की मौजूदा मेडल टैली चार पर पहुंची, जिसमें दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल हैं.
- महिला मुक्केबाजों की सफलता के उलट पुरुष बॉक्सर इस बार खाली हाथ लौटे.

