रविवार, जनवरी 25, 2026
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होमटेक-साइंसवेब ब्राउजर बने रोबोट: अब माउस-कीबोर्ड के बिना खुद करेंगे पूरा काम

वेब ब्राउजर बने रोबोट: अब माउस-कीबोर्ड के बिना खुद करेंगे पूरा काम

वेब ब्राउजर की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है. अब ब्राउजर सिर्फ इंटरनेट खोलने का जरिया नहीं, बल्कि आपके लिए खुद से काम करने वाले स्मार्ट टूल बनते जा रहे हैं. Generative AI के दौर में अब Agentic AI बेस्ड ब्राउजर्स आपके दिए गए कमांड पर खुद से वेबसाइट विजिट करेंगे और आपके लिए टास्क परफॉर्म करेंगे. हाल ही में Perplexity का Comet ब्राउजर लॉन्च हुआ जिसमें इनबिल्ट AI असिस्टेंट दिया गया है. अब Google ने भी Chrome में Gemini इंटिग्रेशन का ऐलान कर दिया है, जिससे ब्राउजिंग का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है.

वेब ब्राउजर्स में बड़ा बदलाव

लंबे समय से वेब ब्राउजर में कोई बड़ा इनोवेशन नहीं हुआ था. चाहे Chrome हो, Safari या Firefox, यूजर एक्सपीरियंस लगभग एक जैसा ही था. लेकिन Generative AI के बूम के बाद अब ब्राउजर स्मार्ट होते जा रहे हैं. Agentic AI तकनीक ने ब्राउजर को इतना एडवांस बना दिया है कि ये आपके कमांड पर खुद से वेबसाइट पर जाकर टास्क पूरा कर सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि यूजर को बार-बार माउस और कीबोर्ड का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा.

Google Chrome में आया Gemini

Google ने हाल ही में घोषणा की है कि उसके Chrome ब्राउजर में अब Gemini का सपोर्ट मिलेगा. कंपनी ने बताया कि इस इंटिग्रेशन से कंप्यूटर और मोबाइल दोनों पर यूजर्स को AI असिस्टेंट की मदद मिलेगी. Chrome में Gemini के आने से यूजर्स वेबपेज का कॉन्टेक्स्ट समझ पाएंगे और वीडियो तक को AI से एक्सप्लेन करवा सकेंगे. Google के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिक ऑस्ट्रेलो ने कहा है कि Chrome अब पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो जाएगा और यह ऐसा बदलाव होगा जिसकी उम्मीद पहले किसी ने नहीं की थी.

AI ब्राउजर्स की बढ़ती रफ्तार

Generative AI के आने के बाद से AI पावर्ड ब्राउजर्स तेजी से लॉन्च हो रहे हैं. Perplexity का Comet ब्राउजर इसका बड़ा उदाहरण है, जिसमें इनबिल्ट AI असिस्टेंट मौजूद है. इस ब्राउजर में यूजर्स न सिर्फ टैब मैनेजमेंट कर सकते हैं बल्कि खुद से रिसर्च भी करवा सकते हैं. यही वजह है कि Comet जैसे Agentic AI ब्राउजर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. इनकी खासियत यह है कि यूजर को अलग टैब में AI टूल्स इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती, सब कुछ ब्राउजर के अंदर ही संभव हो जाता है.

Agentic AI की ताकत

Agentic AI बेस्ड ब्राउजर्स यूजर्स को पूरी तरह नया अनुभव देते हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर आप टिकट बुकिंग कर रहे हैं तो बस AI को बताना होगा और यह आपके लिए बेस्ट डील खुद ढूंढ देगा. अगर किसी वीडियो का ट्रांस्क्रिप्ट चाहिए तो ये असिस्टेंट उसे भी तैयार कर देगा. यहां तक कि वीडियो के किसी खास हिस्से को निकालना है तो यह काम भी आसानी से हो जाएगा. यानी Agentic AI ब्राउजर यूजर के काम को बेहद आसान बना रहे हैं और लगभग बिना किसी हस्तक्षेप के टास्क परफॉर्म कर रहे हैं.

भारत में लॉन्च का इंतजार

फिलहाल Chrome में Gemini का सपोर्ट अमेरिका में शुरू हुआ है. Google ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि इसे भारत में कब लॉन्च किया जाएगा. हालांकि उम्मीद है कि जल्द ही इसे ग्लोबली रोलआउट किया जाएगा. भारत जैसे बड़े मार्केट में AI पावर्ड ब्राउजर्स की डिमांड काफी तेजी से बढ़ सकती है. ऐसे में यूजर्स के लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि कब तक उन्हें माउस और कीबोर्ड के झंझट से छुटकारा मिल पाएगा और AI ब्राउजर्स उनकी जिंदगी को कितना आसान बनाएंगे.

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. Generative AI के बाद अब वेब ब्राउजर्स स्मार्ट होकर खुद से काम करने लगे हैं.
  2. Google ने Chrome में Gemini इंटिग्रेशन की घोषणा की है.
  3. Perplexity का Comet ब्राउजर भी AI असिस्टेंट से लैस है.
  4. Agentic AI ब्राउजर्स यूजर के लिए रिसर्च, डील्स और ट्रांस्क्रिप्ट तक तैयार कर सकते हैं.
  5. Chrome Gemini सपोर्ट अभी अमेरिका में, भारत में लॉन्च का इंतजार.
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