राजस्थान की राजनीतिक ज़मीन एक बार फिर खदबदाने लगी है, इस बार वजह बना है बीएपी पार्टी द्वारा जारी एक विवादास्पद नक्शा, जिसमें अलग ‘भील प्रदेश’ की कल्पना की गई है। इस नक्शे में राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक काल्पनिक राज्य का खाका तैयार किया गया है।
राठौड़ ने साधा निशाना, बोला– ‘जनता अब जागरूक है’
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बीएपी के इस कदम को ‘अवसरवादी राजनीति’ करार देते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब जनता इन झूठे सपनों और भावनात्मक हथकंडों से बहकने वाली नहीं है।
“राजस्थान की एकता और अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा,” उन्होंने दो टूक कहा। राठौड़ ने बीएपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके अपने बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, वही यहां की भोलीभाली जनता को गुमराह करने में लगे हैं।
बीएपी ने फिर उठाई ‘भील प्रदेश’ की मांग
बीएपी पार्टी की ओर से जारी इस नक्शे में न सिर्फ राजस्थान बल्कि पड़ोसी राज्यों के कई हिस्सों को मिलाकर आदिवासी बहुल एक अलग राज्य की मांग रखी गई है। पार्टी का तर्क है कि आदिवासी समुदाय की अलग पहचान और विकास के लिए एक विशेष राज्य की आवश्यकता है।
हालांकि, इस मुद्दे को लेकर विपक्ष में भारी नाराजगी है। भाजपा ने साफ कहा है कि यह केवल आदिवासी भावनाओं को उकसाकर राजनीतिक ज़मीन तलाशने का प्रयास है, जो समाज में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने वाला है।
सरकार का सख्त रुख– कोई क्षेत्रीय विभाजन नहीं
राजस्थान सरकार इस पूरे मामले पर पहले ही अपना रुख साफ कर चुकी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले भी ऐसे आंदोलनों को ‘राज्यविरोधी मानसिकता’ की उपज बताते आए हैं।
सरकार ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय या जातीय आधार पर किसी भी प्रकार की विभाजनकारी मांग को न तो बढ़ावा दिया जाएगा और न ही बर्दाश्त किया जाएगा।
‘भील प्रदेश’ की मांग पर फिर मंथन, लेकिन समर्थन नहीं
बीएपी भले ही अलग राज्य की मांग दोहराकर चर्चा में आने की कोशिश कर रही हो, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस मुद्दे को लेकर जमीन पर समर्थन सीमित ही है। कई सामाजिक संगठन भी इस मांग से दूरी बना चुके हैं।
फिलहाल यह साफ होता जा रहा है कि राजस्थान की एकता से खिलवाड़ की कोई भी कोशिश ना केवल राजनीतिक विरोध झेलेगी, बल्कि जनता की ओर से भी नकार दी जाएगी।

