सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म की रिलीज पर लगी रोक को फिलहाल बरकरार रखा है और निर्माताओं से साफ कहा कि वे केंद्र सरकार द्वारा गठित पैनल के फैसले का इंतजार करें। यह फिल्म राजस्थान के उदयपुर में 2022 में दर्जी कन्हैया लाल की नृशंस हत्या पर आधारित है, जिसकी रिलीज 11 जुलाई को होनी थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि कोर्ट इस मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं करना चाहता और सभी पक्षों की बात सुने जाने के बाद ही निर्णय होगा।
कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) को प्राथमिकता दी जाती है और यह अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) से ऊपर आता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फिल्म रिलीज होने पर अगर हत्या के आरोपियों की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता, भले ही आर्थिक मुआवजा दिया जा सके।
भाटिया और सिब्बल आमने-सामने
सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है और इसका किसी समुदाय को निशाना बनाने का उद्देश्य नहीं है। वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोर देकर कहा कि यह फिल्म समाज में वैमनस्य फैलाने वाली है। उन्होंने कहा कि यदि कोई जज भी यह फिल्म देखे तो वह भी आहत हो सकता है।
पैनल को तत्काल सुनवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के पैनल से बिना देरी के सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए निर्णय लेने को कहा है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि फिल्म से जुड़े निर्माता, निर्देशक और कन्हैया लाल के बेटे को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस पर पीठ ने उन्हें स्थानीय पुलिस के पास जाने की अनुमति दी और पुलिस को निर्देश दिया कि वह खतरे का मूल्यांकन कर आवश्यक सुरक्षा सुनिश्चित करे।
दो याचिकाओं पर हो रही सुनवाई
यह मामला दो याचिकाओं से जुड़ा है— एक रिट याचिका हत्या के एक आरोपी की ओर से दायर की गई है, जबकि दूसरी फिल्म निर्माताओं द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए लगाई गई थी, जिसमें फिल्म की रिलीज पर तब तक रोक लगाई गई थी जब तक केंद्र सरकार इस पर अंतिम निर्णय न ले ले। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र द्वारा गठित पैनल दोपहर 2:30 बजे इस विषय पर सुनवाई करेगा।
विवादास्पद ट्रेलर बना याचिका की जड़
जमीयत की याचिका में कहा गया कि फिल्म का ट्रेलर, जो 26 जून को जारी किया गया था, कई ऐसे संवादों और संदर्भों से भरा है जो 2022 की घटनाओं को भड़काने का माद्दा रखते हैं। उनका दावा है कि इससे समाज में सांप्रदायिक तनाव फिर से सिर उठा सकता है।

