DGMO यानी Director General Military Operations, सेना का वो ओहदा है जो हर एक सैन्य ऑपरेशन की धड़कन होता है। युद्ध की शुरुआत हो या शांति की पहल, DGMO की मुहर के बिना कुछ भी आगे नहीं बढ़ता। DGMO का दफ्तर ही तय करता है कि कब, कहां और कैसे कोई ऑपरेशन चलेगा। इस वक्त भारत के DGMO हैं लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, जिन्होंने पाकिस्तान के DGMO से सीधे बात कर सीजफायर की राह खोली।
सीमा पर तनाव को रोकने वाला पहला दरवाजा
जब भारत-पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश आमने-सामने हों, तो सबसे पहले जिनके बीच बातचीत होती है, वो हैं दोनों देशों के DGMO। 2021 में भी इसी लेवल पर बात हुई थी और अब फिर DGMO की बातचीत से सीजफायर मुमकिन हुआ है। ये सीधा संवाद लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर हालात बिगड़ने से पहले ही थाम लेता है।
सैन्य रणनीति और ऑपरेशनों की पूरी जिम्मेदारी
DGMO सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि पूरा सैन्य प्लानिंग और एक्शन का कंट्रोल टॉवर है। युद्ध के दौरान किस ऑपरेशन को कब अंजाम देना है, किन टुकड़ियों को कहां भेजना है, क्या प्रतिक्रिया देनी है—ये सब फैसले DGMO ही करता है। भारत में ये पद भारतीय सेना के ऑपरेशनल ब्रांच का हिस्सा होता है और इसके अधीन पूरे देश की सैन्य रणनीति चलती है।
सेना, खुफिया एजेंसियों और सरकार के बीच सेतु
DGMO अकेले काम नहीं करता। उसे सेना की तीनों शाखाओं यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना के साथ मिलकर तालमेल बैठाना होता है। साथ ही खुफिया एजेंसियों से मिल रही जानकारी को सैन्य ऑपरेशन में कैसे इस्तेमाल करना है, ये भी DGMO ही तय करता है। यही वजह है कि उन्हें बेहद सतर्क और अपडेट रहना होता है।
सीजफायर से पहले और बाद—DGMO की भूमिका सबसे अहम
जब भी सीमा पर गोलीबारी होती है, तो DGMO लेवल पर ही सबसे पहले प्रतिक्रिया आती है। पाकिस्तान हो या कोई और पड़ोसी देश, भारत का पहला संपर्क DGMO ही करता है। यही वजह है कि हालिया सीजफायर भी DGMO की सीधी बातचीत से ही हो पाया। न सिर्फ गोलीबारी रोकने में, बल्कि भरोसे की बहाली में भी DGMO का रोल सबसे अहम होता है।

- DGMO यानी महानिदेशक मिलिट्री ऑपरेशन सेना का सबसे अहम रणनीतिक पद होता है।
- भारत-पाक के बीच हालिया सीजफायर DGMO की बातचीत के बाद ही मुमकिन हुआ।
- DGMO युद्ध या शांति से जुड़ी हर रणनीति और ऑपरेशन की जिम्मेदारी उठाता है।
- सेना, सरकार और खुफिया एजेंसियों के बीच DGMO सेतु की तरह काम करता है।
- सीमाई तनाव से लेकर बड़े युद्ध तक, DGMO की भूमिका सबसे निर्णायक होती है।

