शुक्रवार, मई 1, 2026
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गाजियाबाद में चल रहा था फर्जी ‘विदेशी दूतावास’, हर्षवर्धन ने ऐसे बुना हवाला-ठगी का अंतरराष्ट्रीय जाल

गाजियाबाद के कविनगर में हर्षवर्धन जैन नाम के शख्स ने एक आलीशान कोठी को ‘फर्जी विदेशी दूतावास’ बना रखा था। वह खुद को माइक्रोनेशन्स का राजदूत बताकर लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी कर रहा था। यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट और स्थानीय पुलिस की छापेमारी में भारी मात्रा में नकली डिप्लोमैटिक पासपोर्ट, फर्जी स्टाम्प, विदेशी मुद्रा, डिप्लोमैटिक गाड़ियां और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। हर्षवर्धन हवाला रैकेट भी चला रहा था। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है और इस पूरे नेटवर्क में शामिल बाकी लोगों की तलाश कर रही है।

गाजियाबाद में आलीशान कोठी को बना रखा था नकली दूतावास

एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि गाजियाबाद के कविनगर इलाके में एक आलीशान घर के अंदर कुछ संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। छापेमारी में सामने आया कि उस घर को हर्षवर्धन जैन ने फर्जी दूतावास की शक्ल दे रखी थी। बाहर विदेशी झंडे लगे थे, अंदर ऑफिस जैसा माहौल और चार लग्ज़री गाड़ियां डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट के साथ खड़ी थीं। सफेद रंग की कोठी पर लगी प्लेटें और झंडे देखकर कोई भी धोखा खा सकता था कि ये कोई असली दूतावास है।

माइक्रोनेशन्स के नाम पर खुद को बताया ‘राजदूत’

हर्षवर्धन खुद को West Arctica, Saborga, Poulvia और Lodonia जैसे माइक्रोनेशन्स का राजदूत बताता था। ये माइक्रोनेशन्स दरअसल ऐसे खुद को देश घोषित करने वाले छोटे-छोटे ग्रुप हैं, जिनकी कोई मान्यता नहीं होती। इनके नाम पर हर्षवर्धन लोगों को इंटरनेशनल कनेक्शन का झांसा देता था और उनके साथ फर्जी तस्वीरें लगाकर खुद को बड़ा अधिकारी दिखाता था। इसी प्रभाव के जरिए वह विदेश में नौकरी दिलाने और वीज़ा दिलवाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलता था।

एसटीएफ ने बरामद किया कैश, विदेशी मुद्रा और सेटेलाइट फोन

नोएडा एसटीएफ और कविनगर पुलिस की जॉइंट रेड में 44.70 लाख रुपये कैश, विदेशी करेंसी, डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी चार गाड़ियां, 12 फर्जी पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय की मोहर लगे कागजात, सेटेलाइट फोन और कई देशों के नकली स्टाम्प बरामद किए गए हैं। हर्षवर्धन हवाला कारोबार में भी शामिल था और शेल कंपनियों के जरिए विदेशों से पैसा मंगा रहा था।

पहले भी दर्ज हो चुका है केस, इंटरनेशनल डीलरों से रिश्ते

जांच में सामने आया कि हर्षवर्धन पर 2011 में भी केस दर्ज हुआ था और उस वक्त भी उससे सेटेलाइट फोन मिला था। साथ ही उसके संबंध विवादित फिक्सर चंद्रास्वामी और हथियार डीलर अदनान ख़शोगी से भी रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह पहले से ही इस तरह की गतिविधियों में लिप्त था।

गैंग या अकेला खिलाड़ी? जांच जारी

फिलहाल एसटीएफ की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि क्या हर्षवर्धन यह ठगी अकेले चला रहा था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी है। फिलहाल सभी गाड़ियां कविनगर थाने में खड़ी हैं और छापेमारी के बाद जुटाए गए दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

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  1. गाजियाबाद के कविनगर में हर्षवर्धन ने आलीशान कोठी को फर्जी दूतावास बना रखा था।
  2. खुद को माइक्रोनेशन्स का राजदूत बताकर विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देता था।
  3. एसटीएफ की छापेमारी में करोड़ों की नकदी, विदेशी मुद्रा, फर्जी दस्तावेज और गाड़ियां बरामद।
  4. पहले भी हर्षवर्धन पर केस दर्ज हो चुका है और इंटरनेशनल डीलरों से उसके रिश्ते हैं।
  5. पुलिस इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है, पूछताछ जारी है।
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