पटना सिटी में मंगलवार तड़के करीब चार बजे विकास उर्फ राजा का एनकाउंटर कर दिया गया। विकास बिहार के कारोबारी गोपाल खेमका के हत्याकांड से जुड़ा बताया जा रहा है। ये मालसलामी इलाके का रहने वाला था। पुलिस पूछताछ के लिए जब उसके घर पहुंची, तो उसने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह ढेर हो गया।
पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि विकास का खेमका मर्डर केस से प्रत्यक्ष रूप से कोई पुख्ता संबंध सामने नहीं आया है। हालांकि, उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले पहले से दर्ज थे और वह कुख्यात शूटर भी था। ऐसे में पुलिस को शक था कि वह हत्या में किसी न किसी रूप में शामिल हो सकता है।
शूटर उमेश की गिरफ्तारी से खुला राज
इस एनकाउंटर से एक दिन पहले यानी सोमवार को पुलिस ने एक और बड़ा एक्शन लिया था। शूटर उमेश राय उर्फ विजय को मालसलामी से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उमेश ने स्वीकार किया कि गोपाल खेमका की हत्या 10 लाख रुपए की सुपारी पर की गई थी और उसे इसके बदले एक लाख रुपए दिए गए।
उमेश ने यह भी खुलासा किया कि घटना के बाद उसने गंगा किनारे एक स्थान पर हथियार छुपा दिए थे। पुलिस ने वहां से बरामदगी भी की है। उसके घर से पिस्टल, 80 कारतूस, दो मोबाइल फोन, एक लाख नकद और हत्या में इस्तेमाल की गई बाइक भी जब्त हुई है।
अजय वर्मा की गिरफ्तारी से जुड़े तार
गिरफ्तारी से पहले उमेश दिल्ली में ‘विजय’ नाम से रह रहा था। जिस दिन अजय वर्मा को STF ने पकड़ा, उसी दिन उमेश भी दिल्ली से पटना लौटा था और अजय से मुलाकात की थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अजय की गिरफ्तारी के बाद उमेश पर भी संदेह गहरा गया था।
SIT जब उमेश के घर पहुंची, तो वह अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने गया हुआ था। इसी दौरान उसे दबोच लिया गया। गिरफ्तारियों के बाद पटना जंक्शन से एक अन्य संदिग्ध को उठाया गया और उमेश की निशानदेही पर कोतवाली थाना क्षेत्र के उदयगिरी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 601 में छापेमारी हुई, जहां से तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।
केस की तह तक पहुंचने की कोशिश
STF और पुलिस की टीमें इस पूरे केस में मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कवायद में जुटी हैं। हालांकि, फिलहाल पुलिस इस बारे में कुछ भी साफ तौर पर बताने से बच रही है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उमेश, हत्या के बाद कुछ घंटों तक उसी अपार्टमेंट में रुका था, जहां खेमका रहते थे।
बताया जा रहा है कि हत्या से पहले ही उमेश ने बाइक का नंबर प्लेट हटा दिया था ताकि उसकी पहचान न हो सके। हालांकि, CCTV फुटेज से उसकी पहचान हो गई, जिसके बाद पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर कार्रवाई शुरू की।
MLC से नजदीकी और हत्या की साजिश
सूत्रों की मानें तो उमेश एक स्थानीय MLC का भी करीबी था। इस एंगल की भी जांच की जा रही है। 4 जुलाई की रात को जब गोपाल खेमका बांकीपुर क्लब से लौट रहे थे, तो अपार्टमेंट के गेट पर ही उन्हें सिर में गोली मार दी गई थी। गोली मारने के बाद आरोपी बाइक से फरार हो गया।
परिजन उन्हें तत्काल मेडिवर्सल अस्पताल ले गए, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस सनसनीखेज हत्याकांड का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें हमलावर को गोली मारकर भागते देखा जा सकता है।
SIT की पूछताछ से सामने आ सकते हैं और नाम
STF और SIT फिलहाल उमेश और हिरासत में लिए गए अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। बड़ा सवाल यही है कि सुपारी किसने दी? हत्या के पीछे असली मकसद क्या था? पुलिस ने अभी तक इस पर चुप्पी साध रखी है और कहा है कि अगले 24 घंटे में बड़ा खुलासा किया जा सकता है।

