अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ की अंतिम तारीख 9 जुलाई से बढ़ाकर 1 अगस्त कर दी है। इस फैसले के तहत बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया समेत 14 देशों पर अब भारी शुल्क लगेगा। कुछ देशों पर 25% टैक्स तय किया गया है, जबकि कुछ पर 30 से 40 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जाएगा।
दक्षिण कोरिया-जापान को मिले सबसे पहले लेटर
ट्रंप प्रशासन ने सबसे पहले जापान और दक्षिण कोरिया को आधिकारिक लेटर भेजकर बताया कि उनके देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर अब 25% शुल्क लगेगा। ट्रंप ने इसमें स्पष्ट किया कि यह कदम व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए अनिवार्य है।
हालांकि जापान और दक्षिण कोरिया अमेरिका के पुराने सहयोगी हैं, लेकिन ट्रंप की ज्यादा टैरिफ मांग और चुनावी माहौल की वजह से समझौता नहीं हो पाया। खासकर कार, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क की बात ने डील को रोक दिया है।
ट्रंप की पुरानी घोषणा से मची थी हलचल
अप्रैल में ही ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामान पर 10% बेसलाइन टैक्स और 60 देशों पर अलग-अलग टैरिफ की बात कही थी। इसके बाद शेयर बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड मार्केट में अस्थिरता फैल गई थी। इसी कारण टैरिफ लागू करने की तारीख को पहले टाला गया और अब इसे फिर से 1 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।
भारत और EU से डील के करीब अमेरिका
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, अमेरिका भारत और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका के बीच गहन बातचीत चल रही है और अनुमान है कि 8 जुलाई को डील की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
ब्रिटेन और वियतनाम के साथ प्रारंभिक समझौते
अमेरिका अब तक केवल ब्रिटेन और वियतनाम के साथ शुरुआती स्तर पर व्यापार समझौते कर चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन पर 10% और स्टील-एल्युमीनियम पर 25% टैक्स लगाया गया है, जबकि वियतनाम से आने वाले उत्पादों पर 20% शुल्क तय हुआ है। दोनों देशों ने अमेरिकी सामानों पर 0% टैक्स लगाया है।
भारत पर 26% टैक्स की आशंका
यदि 1 अगस्त से पहले भारत-अमेरिका के बीच डील नहीं हुई, तो भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 26% टैक्स लागू हो सकता है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
चीन ने जताया विरोध, कहा- धमकी न दें
ट्रंप की चेतावनी के जवाब में चीन ने सख्त विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि वह टैरिफ के जरिए किसी प्रकार की धमकी या दबाव की राजनीति का समर्थन नहीं करता। ब्रिक्स संगठन के मंच से चीन ने कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता पैदा करते हैं।

