भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, असम, मेघालय, कर्नाटक, बिहार, केरल, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में गरज‑चमक के साथ तेज़ बारिश का येलो‑ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी इलाकों खासकर हिमाचल के मंडी, कुल्लू, शिमला व सिरमौर तथा उत्तराखंड के पहाड़ी ज़िलों में ओलावृष्टि और बादल‑फटने जैसे हालात बन सकते हैं।
राजस्थान‑MP में लू का कहर, जयपुर ने तोड़े रिकॉर्ड
राजस्थान के जयपुर ने रविवार को 45 °C पार कर जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर को पीछे छोड़ा। पश्चिमी हिस्सों में चार दिन का ऑरेंज हीटवेव अलर्ट जारी है। मध्यप्रदेश के ग्वालियर‑चंबल और सागर संभाग के आठ ज़िलों में लू के तेवर सोमवार‑मंगलवार बना रहेंगे।
बिहार में बिजली गिरने से 6 मौतें, कई घायल
रविवार को बिहार के अलग‑अलग ज़िलों में आसमानी बिजली ने पांच लोगों की जान ली, जबकि एक महिला पेड़ गिरने से दबकर मारी गई। चार घायल अस्पताल में भर्ती हैं। राज्य प्रशासन ने किसानों और ग्रामीणों को तेज़ चमक‑गरज के दौरान खुले में न जाने की सलाह दी है।
दक्षिण में मूसलाधार बारिश, बेंगलुरु फिर जलमग्न
बेंगलुरु में रविवार शाम झमाझम बारिश से सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। कई घरों में भी पानी घुस गया। तमिलनाडु के कोयंबटूर, तिरुचि और मदुरै में भी तेज हवाओं के साथ बौछारें जारी रहीं। केरल, कर्नाटक तटीय बेल्ट और आंध्र‑रेयलसीमा में 20‑21 मई को भारी वर्षा का अनुमान है।
मानसून ने बढ़ाई रफ़्तार, अरब सागर‑बंगाल की खाड़ी में अनुकूल हालात
दक्षिण‑पश्चिम मानसून अंडमान सागर, मालदीव‑कोमोरिन क्षेत्र और पूर्व‑मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुंच चुका है। IMD के मुताबिक अगले 72 घंटों में मानसून दक्षिण अरब सागर व मध्य‑उत्तर बंगाल की खाड़ी के और हिस्सों में प्रगति करेगा, जिससे केरल‑कर्नाटक तटीय क्षेत्र में प्री‑मानसून शावर तेज़ हो सकते हैं।
हरियाणा‑पंजाब को हल्की राहत, पर चेतावनी बरकरार
IMD चंडीगढ़ ने हरियाणा के 10 ज़िलों—पंचकूला से सोनीपत तक—में 22 मई तक गरज‑बारिश का येलो अलर्ट रखा है। पंजाब में बठिंडा ने 45.3 °C दर्ज किया, लेकिन बीते 24 घंटों में औसतन 1 °C गिरावट ने सांस राहत दी है।
क्या करें, क्या न करें
- तेज़ बिजली‑गरज देखते ही पक्की इमारत में शरण लें; पेड़ या बिजली पोल से दूर रहें।
- लू प्रभावित ज़िलों में दोपहर 12‑4 बजे बाहर न निकलें; पानी, ओआरएस, लाइट कपड़े जरूरी।
- पहाड़ी इलाकों में यात्रा से पहले लोकल प्रशासन से मार्ग‑स्थिति की जानकारी लें।
- खेतों में काम कर रहे किसान बिजली‑चमक के दौरान खेती औजार छोड़ सुरक्षित जगह जाएँ।

