छत्तीसगढ़ के दुर्गम अबूझमाड़ के पांगुड़ इलाके में नई सड़क का काम चल रहा था। यहीं पास के जंगल में मंगलवार दोपहर एक मादा भालू अपने शावक के साथ चहलकदमी कर रही थी। अचानक झाड़ियों से निकलते बाघ ने शावक को दबोचने की कोशिश की। सेकंड भर में मादा भालू चट्टान‑सी अड़ गई, दहाड़ के साथ बाघ पर झप्ती और पंजों‑गर्दन पर कई वार कर डाले। करीब आधे मिनट की इस भिड़ंत के बाद बाघ ने बाजी हारते‑हारते जान बचाना बेहतर समझा और झाड़ी में गुम हो गया।
सड़क निर्माण में लगे मज़दूरों ने शोर सुना तो मोबाइल कैमरा चालू कर दिया। 30‑सेकेंड के इस क्लिप में दिखता है कि बाघ के पीछे हटते ही भालू अपने बच्चे को दायें पंजे में समेटकर घने पेड़ों की ओर निकल जाती है। वीडियो सोशल मीडिया पर ‘मां आखिर मां होती है’ कैप्शन के साथ वायरल है।
‘मातृत्व का साहस किसी भी शिकारी से बड़ा होता है’
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने ट्वीट कर कहा, “अबूझमाड़ की यह घटना दिखाती है कि मातृत्व का साहस किसी भी शिकारी से बड़ा होता है।” मंत्री ने क्षेत्रीय वन अमले को निर्देश दिया है कि सड़क‑निर्माण स्थलों पर ‘वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर’ के मानक उपाय सुनिश्चित करें।
‘बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट है अबूझमाड़
अबूझमाड़ छत्तीसगढ़ का ‘बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट’ है, जहां भालू, बाघ, जंगली कुत्ते और कई दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक ‘ह्यूमन‑वाइल्डलाइफ़ कन्फ्लिक्ट’ कम करने के लिए निर्माण दलों को नाइट‑वर्क पर रोक, कचरा प्रबंधन और हाई‑डेसिबल मशीनरी से बचने की सलाह दी गई है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मादा भालू स्वाभाविक रूप से अति‑रक्षात्मक होती है। शावक को खतरा महसूस होते ही वह बड़ी बिल्लियों से भी भिड़ जाती है। हालिया भिड़ंत इस बात का प्रमाण है कि सड़क कटाई‑छाँट जंगल का शांत पारिस्थितिक संतुलन भंग कर रही है।

