गुरूवार, जून 11, 2026
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सीमा पर शांति से लेकर आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी तक, भारत-चीन में इन मुद्दों पर बनी सहमति

तिआनजिन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम बैठक हुई। इस मुलाक़ात में सीमा पर शांति, व्यापार संतुलन, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और बहुध्रुवीय एशिया को मजबूत करने पर सहमति बनी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि यह बैठक दोनों नेताओं के बीच पिछले एक साल में दूसरी महत्वपूर्ण बातचीत रही, जिसने रिश्तों में सुधार की नई उम्मीदें जगाई हैं और भविष्य के सहयोग का रास्ता साफ किया है।\

SCO शिखर सम्मेलन में अहम बातचीत

तिआनजिन में चल रहे SCO शिखर सम्मेलन में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्च-स्तरीय बैठक हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जानकारी दी कि यह बातचीत साल भर में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाक़ात है। पिछली बार अक्टूबर 2024 में कज़ान में दोनों नेता मिले थे, जहां द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने के लिए कुछ रणनीतिक सुझाव तय हुए थे। इस बार की बातचीत में भी दोनों पक्षों ने रिश्तों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और भरोसे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

सीमा पर शांति और स्थिरता की अहमियत

बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि जब तक सीमा पर हालात सामान्य नहीं होते, तब तक द्विपक्षीय रिश्तों में बड़ी प्रगति की उम्मीद करना मुश्किल होगा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस पर सहमति जताई कि स्थिरता ही आपसी सहयोग की बुनियाद है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर भरोसे का माहौल बनाने से राजनीतिक और आर्थिक दोनों तरह के संबंध आगे बढ़ेंगे और विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

व्यापार सहयोग और आर्थिक तालमेल

बैठक में आर्थिक मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि भारत और चीन के बीच व्यापार संतुलन में सुधार और आर्थिक सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है। मिसरी के अनुसार, चीन ने भारत के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखाई, जबकि भारत ने बाजार तक पहुंच और निष्पक्ष व्यापार पर जोर दिया। बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने से दोनों देशों के 2.8 अरब से ज्यादा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी

बैठक में आतंकवाद को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात से सहमति जताई और कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। दोनों नेताओं ने साझा कदम उठाने, सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुट होकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बहुध्रुवीय एशिया की दिशा में सहयोग

बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने सहयोग को मजबूत करने के लिए चार सुझाव पेश किए। इन सुझावों में आर्थिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान, सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाना और राजनीतिक संवाद को नियमित करना शामिल था। प्रधानमंत्री मोदी ने इन सुझावों का स्वागत किया और कहा कि भारत बहुध्रुवीय एशिया के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएगा। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि सहयोग बढ़ाने से न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया में स्थिरता और विकास का माहौल बनेगा।

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. तिआनजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की साल भर में दूसरी अहम बैठक हुई।
  2. सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों की प्रगति की बुनियाद बताया गया।
  3. व्यापार सहयोग बढ़ाने और व्यापार संतुलन में सुधार पर जोर दिया गया।
  4. आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और समन्वय पर सहमति बनी।
  5. बहुध्रुवीय एशिया के निर्माण और आपसी सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया गया।
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