गुरूवार, जून 4, 2026
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जैसलमेर में सेना का हाई अलर्ट ऑपरेशन: सड़क पर उतरे हेलिकॉप्टर, घुसपैठियों और ड्रोन को एक साथ किया नेस्तनाबूद

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके जैसलमेर में आज भारतीय सेना ने ऐसा युद्धाभ्यास किया, जिसने ये साबित कर दिया कि अगर एक साथ ड्रोन हमला, साइबर अटैक और घुसपैठ हो जाए तो हमारी सेना कैसे पलटवार करेगी। इस रिहर्सल में सब कुछ रियल टाइम की तरह हुआ — हेलिकॉप्टर सड़क पर उतरे, आतंकी जैसे लक्ष्यों को खत्म किया और फिर बिना वक्त गंवाए वापस उड़ान भर ली। इसे ‘हेलिबोर्न ऑपरेशन’ कहा जाता है।

हेलिकॉप्टर लैंडिंग से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई तक

इस पूरे एक्सरसाइज में चेतक और चीता जैसे फुर्तीले हेलिकॉप्टर शामिल रहे। सैनिक हवा से सीधा जमीन पर उतरे और आतंकी अड्डों को खत्म किया। एक बार मिशन पूरा होते ही वो दोबारा हेलिकॉप्टर में सवार होकर निकल गए — बिल्कुल सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर।

घुसपैठिए और ड्रोन एक साथ आए तो कैसी होगी तैयारी

इस पूरे ऑपरेशन की थीम यही थी कि जब दुश्मन एक साथ अलग-अलग तरीकों से हमला करे — जैसे ड्रोन से बमबारी, साइबर अटैक और सीमा से घुसपैठ — तो सेना कैसे रिएक्ट करेगी। जवाब साफ है, पलटवार भी उसी लेवल का होगा और दुश्मन को वक्त ही नहीं मिलेगा संभलने का।

टैंक और तोपों के साथ किया असली जंग जैसा अभ्यास

इस अभ्यास में सिर्फ हेलिकॉप्टर ही नहीं, बल्कि सेना के टैंक और आर्टिलरी गन भी शामिल थे। रेगिस्तान में तेजी से मूव करने वाली टुकड़ियों ने सैटेलाइट और ड्रोन से मिले डेटा के जरिए टारगेट को ढूंढा और उसे खत्म किया। इसके बाद आर्टिलरी फायरिंग से तय किया गया कि दुश्मन पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो जाए।

सिर्फ दिखावा नहीं, पूरी तैयारी का सबूत था ये ऑपरेशन

जैसलमेर की सड़कों पर उतरे ये हेलिकॉप्टर सिर्फ ट्रेनिंग के लिए नहीं थे, ये उस तैयारी का हिस्सा थे जो सेना लगातार करती है — ताकि अगर कल को कोई भी हमला हो जाए, चाहे वो तकनीकी हो या जमीनी, जवाब ऐसा मिले जो दुनिया याद रखे।

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. जैसलमेर में भारतीय सेना ने हाई-इंटेंसिटी हेलिबोर्न ऑपरेशन का अभ्यास किया।
  2. चेतक और चीता हेलिकॉप्टर सड़क पर उतरे, टारगेट खत्म कर लौटे।
  3. ड्रोन, घुसपैठ और साइबर अटैक की एकसाथ चुनौती पर किया गया अभ्यास।
  4. टैंक और आर्टिलरी गनों से भी रेगिस्तानी इलाकों में जंग जैसा ऑपरेशन हुआ।
  5. सेना की रणनीति में सैटेलाइट, ड्रोन और रीयल टाइम फीड का भी रहा अहम रोल।
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