पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में आज शुक्रवार को रथयात्रा निकाली जा रही है। सवेरे से ही देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं और अपने प्रभु की एक झलक पाने को आतुर हैं। सवेरे 6 बजे भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती के साथ रथयात्रा की विधियां शुरू हुई। इसके बाद श्रीविग्रह का विशेष श्रृंगार हुआ और खिचड़ी भोग अर्पित किया गया। परंपरागत दैनिक पूजा विधियों के संपन्न होने पर सवेरे करीब 9:30 बजे भगवान को मंदिर से बाहर लाने की रस्में शुरू हुईं।
दोपहर 3 बजे पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव पारंपरिक ‘छेरा पहनरा’ यानी सोने के झाड़ू से रथ के आगे मार्ग बुहारने की रस्म निभाएंगे। इस पवित्र परंपरा के साथ ही रथयात्रा औपचारिक रूप से आरंभ हो जाएगी।
गुंडिचा मंदिर की ओर करेंगे प्रस्थान
रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह स्थान भगवान की मौसी का घर माना जाता है और यहां वे 7 दिन तक विश्राम करते हैं। इस यात्रा को जगन्नाथ जी के ‘नवयोवन दर्शन’ के बाद की महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में देखा जाता है।
पुरी में पहुंचे लाखों श्रद्धालु
श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
पुरी के जिलाधिकारी के अनुसार, यात्रा मार्ग पूरी तरह श्रद्धालुओं से भरा हुआ है और सभी व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से संचालित की जा रही हैं। सभी धार्मिक परंपराएं समयबद्ध तरीके से निभाई जा रही हैं। वहीं, भाजपा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ ब्रह्मांड के संचालनकर्ता हैं और आज के इस आयोजन में पूरे विश्व की श्रद्धा समाहित है।
पुरी में रथयात्रा की सभी तैयारियां पूरी
रथयात्रा से पहले कलाकारों ने दी प्रस्तुति
सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने पुरी में बनाई भगवान की प्रतिमा

पश्चिम बंगाल के दीघा में पहली बार निकली रथयात्रा
पश्चिम बंगाल के तटीय शहर दीघा में आज पहली बार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन हुआ। इस रथयात्रा का उद्घाटन राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधिवत रूप से किया। जैसे ही रथ यात्रा प्रारंभ हुई, श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर और रथ मार्ग पर उमड़ पड़ी।
सीएम बनर्जी ने इस भव्य मंदिर की परिकल्पना दिसंबर 2018 में की थी। उसी समय उन्होंने जगन्नाथ मंदिर निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद वर्ष 2022 में निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। मंदिर का औपचारिक उद्घाटन इसी वर्ष 30 अप्रैल को किया गया था।
बलभद्र और सुभद्रा के साथ भगवान
मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। आज रथयात्रा के अवसर पर तीनों विग्रहों को सजाकर रथ में विराजमान किया गया और धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच यात्रा आरंभ हुई।

