ओडिशा के बालासोर जिले में फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज की एक छात्रा की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। 20 वर्षीय यह छात्रा, जो इंटीग्रेटेड B.Ed कोर्स की सेकेंड ईयर की स्टूडेंट थी, पिछले तीन दिनों से भुवनेश्वर AIIMS के बर्न यूनिट में भर्ती थी। 95 फीसदी झुलसी छात्रा ने सोमवार देर रात लगभग 11:45 बजे दम तोड़ दिया।
छात्रा ने 12 जुलाई को कॉलेज कैंपस में खुद पर केरोसीन डालकर आग लगा ली थी। उसके इस कदम के पीछे कॉलेज के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HOD) समीर कुमार साहू द्वारा किए गए कथित सेक्शुअल हैरेसमेंट को वजह बताया जा रहा है। छात्रा पहले कॉलेज प्रिंसिपल से मिलने गई थी, लेकिन उसे शिकायत वापस लेने को कहा गया। इससे आहत होकर उसने आत्मदाह कर लिया।
घटना के बाद ओडिशा पुलिस ने उसी दिन आरोपी HOD को गिरफ्तार कर लिया था। राज्य सरकार ने कॉलेज प्रिंसिपल दिलीप घोष को तत्काल सस्पेंड किया, लेकिन 14 जुलाई को राज्यभर में उठे विरोध के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। इसके अलावा जिला पुलिस और राज्य क्राइम ब्रांच की टीम भी जांच में जुटी हुई हैं। पूर्वी रेंज के डीआईजी सत्यजीत नाइक ने SIT बनाए जाने की पुष्टि की है, जिससे जांच की गति तेज हुई है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने की थी मुलाकात
14 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू AIIMS भुवनेश्वर पहुंचीं और पीड़िता से मुलाकात की। वे दीक्षांत समारोह के सिलसिले में वहां थीं, लेकिन पीड़िता की हालत जानने के लिए उन्होंने बर्न यूनिट का दौरा किया और परिवार को हरसंभव इलाज का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, सख्त कार्रवाई का वादा
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने छात्रा की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।
राज्यभर में छात्र संगठनों का विरोध
घटना के बाद से ही ओडिशा में कई जगहों पर छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इन प्रदर्शनों में कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता जाहिर की जा रही है।
सवालों के घेरे में कॉलेज प्रशासन
पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ कॉलेज की कार्यप्रणाली बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत को गंभीरता से न लेना और उल्टे छात्रा पर दबाव डालना, एक गहरे प्रशासनिक और नैतिक संकट की ओर इशारा करता है।

