पानीपत शहर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में दो दिन पहले मॉर्निंग असेंबली के तुरंत बाद 8वीं कक्षा का पीरियड शुरू हुआ। संस्कृत अध्यापिका महजीब अंसारी उर्फ ‘माही’ ने महज तीन‑चार मिनट का परिचयात्मक लेक्चर दिया और उसी दौरान छात्रों से कलमा “लाइलाहा… ” दोहराने को कहा। बच्चों ने बिना सवाल किए पढ़ लिया, पर घर पहुंचते ही वही पंक्तियां गुनगुनाईं तो माता‑पिता चौंक पड़े।
अभिभावकों का हंगामा, हिंदू महासभा की एंट्री
अगली सुबह करीब दर्जन‑भर अभिभावक हिंदू महासभा के सदस्यों के साथ स्कूल गेट पर जमा हुए। उन्होंने प्रिंसिपल इंदु शर्मा को घेरते हुए आरोप लगाया कि यह “धार्मिक indoctrination” है और बर्दाश्त नहीं होगा। सूचना मिलते ही थाना मॉडल टाउन पुलिस मौके पर आई, लेकिन हालात बिगड़ने से पहले ही समझौता करा दिया गया। कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई, पर माहौल गर्म रहा।
स्कूल प्रबंधन का फैसला: शिक्षिका तुरंत सेवामुक्त, माफी भी मांगी
लगातार दबाव को देखते हुए प्रिंसिपल ने आपात स्टाफ‑मिटिंग बुलाई। महजीब अंसारी, जो पिछले एक साल से संस्कृत पढ़ा रही थीं, ने अपनी ‘भूल’ स्वीकार कर माफी मांगी। प्रबंधन ने अभिभावकों को “पूरे सहयोग” का आश्वासन दिया और उसी दिन शिक्षिका की नियुक्ति रद्द कर दी। स्कूल रजिस्टर में उनका आधिकारिक नाम बरकरार है; ‘माही’ सिर्फ निकनेम था, प्रिंसिपल ने यह कहते हुए नाम‑छुपाने की साजिश से इनकार किया।
क्यों उठा ‘कलमा’ का मुद्दा?
- संस्कृत क्लास में इस्लामी कलमा पढ़वाना — अभिभावकों के मुताबिक यह पाठ्यक्रम से बाहर था।
- संस्कृति‑संवेदनशील माहौल — हरियाणा के कई निजी स्कूल “वैकल्पिक प्रार्थनाओं” की अनुमति नहीं देते।
- सोशल मीडिया पर वायरल — वीडियो न होने के बावजूद घटना की खबर फेसबुक‑वॉट्सऐप पर तेजी से फैली, जिससे जन‑दबाव और बढ़ा।
क्या कहती है शिक्षा नीति?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विद्यालयों को सांस्कृतिक विविधता का सम्मान सिखाने पर जोर देती है, लेकिन धार्मिक पाठ स्कूल‑समय में शामिल करने की इजाजत नहीं देती। किसी भी आस्था‑विशेष के मंत्र या प्रार्थना को पढ़ाने से पहले अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य है।
फिलहाल स्कूल ने आंतरिक जांच कमेटी बनाकर सप्ताहभर में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी नोटिस जारी किया है। अगर नियम‑उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संस्थान पर आचार‑संहिता के तहत कार्रवाई संभव है।

