रविवार, मई 3, 2026
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आसान नहीं प्रशांत किशोर के लिए केजरीवाल वाली राह!

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने पूरी ताकत लगा दी है। एक BJP-JDU का NDA गठबंधन, तो दूसरी ओर RJD-कांग्रेस का ‘INDIA’ गठबंधन लेकिन चुनाव इस बार सिर्फ 2 धड़ों में नहीं बंटा है। चुनाव में एंट्री हो चुकी है तीसरे सुपर हीरो जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर की। देखना है कि इस बार के चुनाव में ये थर्ड फ्रंट कितना कमाल कर पाएगा। क्योंकि इस बार की कहानी में जनता बाबा भारती की तरह नहीं है जो डागू खड़ग सिंह का घोड़ा धोखेबाजी से चुरा ले।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 से शुरू होती है कहानी

दिल्ली का वो चुनाव जिसने राजनीति में भूचाल ला दिया था। समय था 28 दिसंबर 2013 जब केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। ये सिर्फ चुनाव नहीं था ये था भावनाओं का उफान, उम्मीदों का तूफान, आशाओं की किरण, भागीदारी का रण, जनता की हिस्सेदारी का चरण।।। अब इसी डगर पर हैं बिहार में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर।

प्रशांत किशोर कर पाएंगे केजरीवाल वाला जादू?

अब सवाल बनता है कि क्या प्रशांत किशोर भी केजरीवाल वाला जादू कर पाएंगे। क्योंकि समय बहुत दूर नहीं और उनको तो आप मीडिया में देख ही रहे हैं। प्रशांत किशोर पूरी मेहनत से विधानसभा चुनाव में जुटे हुए हैं। हर रोज रैलियां कर रहे हैं। जनता के बीच जा रहे हैं। जैसे भी हो सकता है वो सीधा केजरीवाल की तरह जनता से कनेक्ट करने की पुरजोर कोशिश में हैं।

लेकिन अब न तो समय वैसा है और न राजनीति। बिहार की जनता भी दिल्ली की जनता से भिन्न है। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में मुद्दों से ज्यादा लंबे समय से कांग्रेस के प्रति लोगों का जो गुस्सा था। उसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिला था। लोगों ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार के प्रति चल रहे आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी पर भरोसा जताया और दिल्ली कुर्सी सौंप दी।

बिहार की जनता को निराशा लगी हाथ

बिहार में NDA गठबंधन को RJD पर लगते रहे जंगलराज, भ्रष्टाचार, गुंडाराज के आरोपों की उपज कहा जा सकता है! क्योंकि बिहार में लंबे समय तक लालू का राज रहा। उनकी सरकार पर तमाम तरह के आरोप भी लगते रहे। नौकरी के बदले जमीन लेने का हो या चारा घोटाला। इन तमाम घटनाओं बिहार की जनता को हताश किया था।

प्रशांत किशोर के लिए राह इतनी आसान नहीं है। क्योंकि हाल ही में हुए एक पॉडकास्ट में प्रख्यात कवि और पूर्व आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता रहे कुमार विश्वास ने जिस तरह का खुलासा किया है उससे तो लगता है कि कहीं केजरीवाल की राह ही न प्रशांत किशोर के लिए मुसीबत बन जाए। क्योंकि लोकतंत्र में विश्वास जीतना इतना आसान नहीं होता।

जनता का विश्वास जीतना जरूरी

कुमार विश्वास ने कहा था कि जिस तरह से केजरीवाल ने जनता का भरोसा जीता था, जनता का भावनात्मक जुड़ाव था आप से लेकिन शराब घोटाला और तमाम तरह के घोटालों के आरोपों ने उस विश्वास का गला घोंट दिया। उन्होंने कहा बिहार में प्रशांत किशोर से मुझे बड़ी आशा है। वो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन लोग उन पर भी शंका कर रहे होंगे क्योंकि एक व्यक्ति ने उसी तरह का मॉडल अपना कर लोगों को विश्वास तोड़ा। उन्होंने प्रशांत किशोर का जिक्र करते हुए एक कहानी सुनाई।

सुदर्शन जी की प्रसिद्ध कहानी ‘हार की जीत’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा ‘बाबा भारती के पास एक घोड़ा था, वो घोड़ा वहां के एक बड़े डाकू खड़ग सिंह को पसंद आ गया। उसने बाबा जी से घोड़ा मांगने का आग्रह किया। ‘बादल’ नाम का घोड़ा था। बाबा ने कहा नहीं दूंगा।

एक बार बाबा दिन में जा रहे थे, बूढ़ा भिखारी कंबल ओढ़कर बैठा हुआ था, कह रहा था ‘ले चलो-ले चलो’ बाबा भारती ने आगे बैठा लिया। वो बाबा भारती को धक्का देकर घोड़ा लेकर भागने लगा। क्योंकि वो डाकू खड़ग सिंह था। इस पर बाबा भारती ने कहा ‘इस बात की किसी से चर्चा मत करना, लोग असहायों पर विश्वास करना बंद कर देंगे’

प्रशांत किशोर को जीत की आस

कमोबेश आज भी प्रशांत किशोर के लिए स्थिति वैसी ही है। उन्होंने 2024 में हुए उपचुनाव में देख लिया है। प्रशांत किशोर की पार्टी ने 4 सीटों (रामगढ़, इमामगंज, तरारी, और बेलागंज) पर उपचुनाव लड़ा लेकिन उनकी पार्टी को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके लिए उनके लिए तसल्ली देने वाली बात ये रही कि उन्होंने इमामगंज और बेलागंज में अच्छा प्रदर्शन किया और उनकी पार्टी के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।

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