चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बड़ा और सशक्त संदेश देते हुए संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) पर साइन करने से इनकार कर दिया। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। गुरुवार को हुई इस अहम बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की गंभीर चिंताओं को जॉइंट स्टेटमेंट में अपेक्षित स्थान न मिलने के चलते यह निर्णय लिया गया।
बैठक के समापन के समय जब सभी देशों को साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए आमंत्रित किया गया, उस वक्त भारत ने स्पष्ट रूप से अपना असहमति पत्र रखा। भारत का कहना था कि आतंकवाद, खासकर सीमा पार से प्रायोजित गतिविधियों, पर कथित रूप से ढीले रुख के चलते वह इस दस्तावेज़ को समर्थन नहीं दे सकता।
भारत का रुख- आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं
भारत लंबे समय से SCO मंच पर यह मांग करता आया है कि आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत, स्पष्ट और एकमत नीति बनाई जाए, जिसमें ‘जीरो टॉलरेंस’ की भावना शामिल हो। इस बार के घोषणापत्र में भारत को यह संतुलन नजर नहीं आया। सूत्रों की मानें तो इसमें पाकिस्तान या सीमापार आतंकी नेटवर्क का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया, जो कि भारत की प्रमुख चिंता रही है।
इससे पूर्व बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत ने लश्कर-ए-तैयबा के जैसे आतंकी हमलों के पैटर्न को पहचान कर सीमा पार जवाबी कार्रवाई की।
इस दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी बैठक में मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा कि कुछ देश आतंकियों को पनाह देकर फिर इनकार करते हैं, और इस तरह के डबल स्टैंडर्ड अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की अपील
राजनाथ सिंह ने SCO मंच से सभी सदस्य देशों से अपील की कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ जैसी चुनौतियों से लड़ने के लिए एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि शांति, सुरक्षा और भरोसे की कमी का सबसे बड़ा कारण यही बुराइयां हैं, जो हमारी साझा सुरक्षा को कमजोर करती हैं।
भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति स्पष्ट
राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय तनाव और संघर्ष को रोकने के लिए संवाद और सहयोग को ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अकेले वैश्विक समस्याओं से नहीं निपट सकता। भारत की संस्कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ इसी सहयोग की भावना को दर्शाती है।
महामारी और जलवायु जैसे संकटों पर चेताया
कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों—चाहे वो महामारी हो, जलवायु परिवर्तन या साइबर अपराध—का कोई सीमा क्षेत्र नहीं होता। इनसे मुकाबला करने के लिए वैश्विक एकता अनिवार्य है।
SCO क्या है और इसका उद्देश्य
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक बहुपक्षीय क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके सदस्य बने जबकि ईरान 2023 में जुड़ा। SCO का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है, खासकर आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाना।

