रविवार, मई 3, 2026
spot_img
होमटॉप न्यूज28 घंटे के सफर के बाद अंतरिक्ष में पहुंचे शुभांशु, बने इंटरनेशनल...

28 घंटे के सफर के बाद अंतरिक्ष में पहुंचे शुभांशु, बने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय, 14 दिन तक करेंगे रिसर्च

26 जून की शाम 4 बजे का वक्त भारत के अंतरिक्ष इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। शुभांशु शुक्ला, भारत के युवा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री, 28 घंटे की रोमांचकारी यात्रा के बाद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर सफलतापूर्वक पहुंच गए। एक्सियम मिशन 4 के अंतर्गत शुभांशु समेत कुल चार अंतरिक्ष यात्रियों की यह उड़ान 25 जून दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई थी, जिसे पहले मौसम और तकनीकी दिक्कतों के चलते छह बार टाला जा चुका था।

1984 के बाद दूसरी बार भारतीय की मौजूदगी अंतरिक्ष में

शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय हैं। इससे पहले, भारत से राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रा की थी। यानी करीब 41 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद फिर से किसी भारतीय ने अंतरिक्ष में नई इबारत लिखी है। अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के योगदान की यह एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।

‘नमस्ते फ्रॉम स्पेस’: अंतरिक्ष से शुभांशु का संदेश

अंतरिक्ष से जब शुभांशु का लाइव संदेश आया, तो उसमें रोमांच, विनम्रता और मानवीय भावनाओं का अद्भुत संगम दिखा। उन्होंने कहा— “नमस्ते फ्रॉम स्पेस! मैं यहां एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं… कैसे चलना है, कैसे खाना है, खुद को कैसे नियंत्रित करना है। यह अनुभव नया है, चुनौतीपूर्ण है, लेकिन आनंददायक भी है।”

उन्होंने उस पल का भी ज़िक्र किया जब लॉन्चपैड से स्पेसक्राफ्ट की उड़ान शुरू हुई— “ऐसा लगा जैसे किसी ने सीट में पीछे धकेल दिया हो। फिर सबकुछ शांत हो गया, जैसे वैक्यूम की नीरवता में तैर रहा हूं।”

भारतीय संस्कृति का प्रतीक हंस लेकर गए शुभांशु

अंतरिक्ष में भारत की सांस्कृतिक पहचान को साथ लेकर गए शुभांशु ने अपने संदेश में एक खास बात कही— “हमने ‘हंस’ को अपने साथ लाया है। यह दिखने में प्यारा है, लेकिन भारतीय संस्कृति में यह बुद्धिमत्ता और विवेक का प्रतीक भी है। यह सिर्फ एक संयोग नहीं है, यह एक गहरी सांस्कृतिक समझ का प्रतीक है।”

शुभांशु की भावना: यह मेरी नहीं, हम सभी की उपलब्धि है

अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सामूहिक मेहनत की सफलता है। “मैं हर उस इंसान को धन्यवाद देता हूं जो इस सफर का हिस्सा रहा। परिवार, दोस्तों और वैज्ञानिकों के सहयोग से ही यह संभव हो पाया है। यह एक व्यक्ति की नहीं, हम सबकी यात्रा है।”

अंतरिक्ष में शुरुआती घबराहट, फिर तेजी से ढलने लगे

उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें थोड़ी बेचैनी महसूस हुई, लेकिन अब वे पूरी तरह से इस माहौल में ढल चुके हैं। “मुझे बताया गया है कि मैंने खूब नींद ली है, जो इस वातावरण में अनुकूलन का संकेत है। मैं खुद को ठीक महसूस कर रहा हूं और हर पल का आनंद ले रहा हूं।”

14 दिन तक अंतरिक्ष में रिसर्च और प्रयोग

अब अगले 14 दिनों तक शुभांशु और उनकी टीम ISS पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परीक्षणों में हिस्सा लेंगी। यह मिशन अंतरिक्ष में मानव अस्तित्व, जीवन प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित कई अहम जानकारियों का संग्रह करेगा।

अन्य खबरें