Monday, July 20, 2026
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IIA बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने खोजा दुर्लभ तारा, 25,800 प्रकाश वर्ष दूर जर्मेनियम से भरपूर है

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रहस्यमय तारा खोजा है जिसने विज्ञान जगत को चौंका दिया है। बात है A980 नाम के एक तारे की, जो धरती से करीब 25,800 प्रकाश वर्ष दूर है। इसे पहले एक सामान्य हाइड्रोजन-कमी वाला कार्बन तारा समझा जा रहा था, लेकिन हालिया शोध में यह कहानी कुछ और ही निकली।

लद्दाख की ठंडी रात और तारों की जासूसी

लद्दाख की ऊँचाइयों पर स्थित हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप का इस्तेमाल हुआ इस खोज में। वैज्ञानिकों ने जब A980 की रोशनी का बारीकी से विश्लेषण किया – यानी उसका स्पेक्ट्रम देखा – तो उन्हें कुछ ऐसा मिला जो पहले किसी ने नहीं देखा था। तारों के स्पेक्ट्रम को यूं समझिए जैसे उनका डीएनए, और A980 का डीएनए कुछ अलग ही कहानी कह रहा था।

आठ गुना ज्यादा जर्मेनियम!

शोध में सामने आया कि इस तारे में जर्मेनियम नाम का एक दुर्लभ धातु तत्व, हमारे सूर्य की तुलना में आठ गुना ज़्यादा मात्रा में मौजूद है। हां, वही जर्मेनियम जो ज़्यादातर सेमीकंडक्टर डिवाइसेज़ में इस्तेमाल होता है। लेकिन ये बात सिर्फ तकनीक की नहीं है, ये ब्रह्मांड की केमिस्ट्री को समझने की चाबी है।

EHe तारा या कुछ और?

A980 को अब एक्सट्रीम हीलियम (EHe) तारे की श्रेणी में रखा गया है- एक ऐसा वर्ग जो बेहद दुर्लभ है और जिसकी जानकारी वैज्ञानिकों के पास सीमित है। डॉ. गजेंद्र पांडे, जो इस शोध से जुड़े हैं, कहते हैं कि यह खोज तारकीय रसायन विज्ञान की सीमाओं को नए स्तर पर ले जाती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “तारों की रोशनी में जो कहानियां छिपी होती हैं, उन्हें हम स्पेक्ट्रोस्कोपी से पढ़ सकते हैं।”

दो सफेद बौनों की टक्कर?

शोध का नेतृत्व कर रहे अजय सैनी ने बताया कि EHe तारे शायद तब बनते हैं जब दो सफेद बौने तारे- एक हीलियम से भरपूर और दूसरा कार्बन-ऑक्सीजन से टकराकर एक हो जाते हैं और यह टक्कर होती है… तो सोचिए, कितना भारी विस्फोट और रासायनिक बदलाव होता होगा! शायद तभी A980 में इतनी मात्रा में जर्मेनियम मिल पाया।

स्पेक्ट्रम में दिखी अनदेखी रेखाएं

वैज्ञानिकों को A980 के स्पेक्ट्रम में Ge II यानी सिंगल-आयनाइज्ड जर्मेनियम की रेखाएं दिखीं। इसका मतलब ये कि तारे के भीतर जर्मेनियम के परमाणुओं ने एक इलेक्ट्रॉन खो दिया है – और यही उसका स्पेक्ट्रल सिग्नेचर बना। ये पहली बार है जब EHe तारे में Ge II की रेखाएं मिली हैं।

AGB चरण की ओर इशारा?

संकेत ये भी हैं कि A980 का अतीत तारकीय विकास के AGB (Asymptotic Giant Branch) चरण से जुड़ा हो सकता है – एक ऐसा वक्त जब तारे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंचते हैं और भारी तत्वों का निर्माण शुरू करते हैं। यही वह समय हो सकता है जब A980 ने स्ट्रोंटियम, बेरियम और जर्मेनियम जैसे तत्वों को पैदा किया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, A980 जैसे तारों की खोज केवल खगोलशास्त्र के पन्नों में नहीं जुड़ती, बल्कि ब्रह्मांड की उन अदृश्य प्रक्रियाओं की झलक भी देती है जिनसे सारा पदार्थ बनता है – हम, आप, धरती, सबकुछ। और अब, इस जर्मेनियम के सुराग ने खगोलविदों के सामने एक नई पहेली रख दी है।

कोई कह सकता है, तारा है… चमक रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए वो सिर्फ चमक नहीं – वो एक बीता हुआ इतिहास है, एक ब्रह्मांडीय दस्तावेज़। और A980 जैसे तारे हमें बताते हैं कि सितारों की कब्रों से भी नई कहानियाँ निकलती हैं।

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  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने A980 नामक एक अनोखे तारे की खोज की है जो 25,800 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।
  • यह तारा एक्सट्रीम हीलियम (EHe) वर्ग में आता है और इसमें जर्मेनियम की मात्रा सूर्य से आठ गुना अधिक पाई गई है।
  • शोधकर्ताओं ने लद्दाख स्थित हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप से इस तारे का स्पेक्ट्रम विश्लेषण किया, जिससे यह चौंकाने वाली खोज सामने आई।
  • इस तारे में Ge II (सिंगल-आयनाइज्ड जर्मेनियम) रेखाएं भी मिलीं, जो पहले किसी भी EHe तारे में नहीं देखी गई थीं।
  • यह खोज ब्रह्मांडीय रसायन और तारकीय विकास की प्रक्रिया को समझने में एक नई दिशा दे सकती है और एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है।
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