शनिवार, मई 2, 2026
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पृथ्वी के लिए आज रवाना होंगे शुभांशु शुक्ला, 23 घंटे बाद पहुंचेगे, अंतरिक्ष में किए 60 प्रयोग

भारत के वायुसेना अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला समेत चार सदस्यीय टीम आज 14 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी की ओर रवाना होगी। स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट शाम 4:35 बजे आईएसएस से अनडॉक करेगा और 15 जुलाई को दोपहर करीब 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर समुद्र में स्प्लैशडाउन होगा।

60 से अधिक प्रयोगों में भागीदारी

अपने 17 दिनों के मिशन में शुभांशु ने कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया। इनमें भारत के सात विशेष प्रयोग शामिल थे, जैसे अंतरिक्ष में मेथी और मूंग की खेती, हड्डियों की मजबूती पर रिसर्च, और स्पेस माइक्रोएल्गी से जुड़ा प्रयोग। ये सारे प्रयोग भविष्य के भारतीय गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

अंतरिक्ष से पीएम से संवाद

28 जून को शुभांशु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉल पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष से भारत बेहद खूबसूरत नजर आता है। इस बातचीत में हल्के-फुल्के अंदाज़ में पीएम ने पूछा कि वे गाजर का हलवा साथ ले गए थे या नहीं, जिस पर शुभांशु ने मुस्कुराते हुए बताया—”हां, साथियों को भी खिलाया।”

स्टूडेंट्स और ISRO से बात

ISS में रहते हुए शुभांशु ने तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500 से अधिक छात्रों से हैम रेडियो के जरिए बातचीत की। यह युवाओं में STEM विषयों के प्रति रुचि बढ़ाने की एक पहल थी। 6 जुलाई को उन्होंने ISRO के वैज्ञानिकों और चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन से संवाद कर अपने प्रयोगों और भारत के गगनयान मिशन के योगदान पर चर्चा की।

41 साल बाद भारतीय अंतरिक्ष में

1984 में राकेश शर्मा के बाद शुभांशु ऐसे पहले भारतीय हैं, जिन्होंने ISS की यात्रा की। वे गगनयान मिशन के लिए भारत की तैयारी के महत्वपूर्ण अंग हैं। यह मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष अभियान होगा, जिसे 2027 में लॉन्च करने की योजना है। इस अनुभव से मिली जानकारी भारत के भविष्य के स्पेस प्रोग्राम के लिए पूंजी साबित हो सकती है।

एक्सियम-4: प्राइवेट स्पेस मिशन में भारत की भागीदारी

शुभांशु एक्सियम-4 मिशन का हिस्सा हैं, जो अमेरिकी कंपनी Axiom Space, NASA और SpaceX की साझेदारी में हुआ। इस मिशन में भारत ने एक सीट के लिए लगभग ₹548 करोड़ का भुगतान किया। 25 जून को उन्होंने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी, और 26 जून को ISS पहुंचे। तकनीकी और मौसम से जुड़ी अड़चनों के चलते इस उड़ान को छह बार टालना पड़ा था।

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