शनिवार, मई 2, 2026
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तेलंगाना फार्मा फैक्ट्री ब्लास्ट में मौत का आंकड़ा 42 पहुंचा , छह दिन बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी

पाशमिलारम इंडस्ट्रियल एरिया में सिगाची इंडस्ट्रीज की फार्मा फैक्ट्री में 30 जून को हुए भयावह विस्फोट के छह दिन बाद भी राहत और बचाव कार्य जारी है। रविवार को अस्पताल में इलाज के दौरान एक और घायल की मौत हो गई, जबकि एक अन्य मृतक की पहचान DNA जांच के जरिए हुई है। अब तक कुल 42 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 8 लोग अभी भी लापता हैं।

जले अंग और हड्डियों की बरामदगी

हादसे के बाद सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम को शनिवार और रविवार को घटनास्थल से कुछ जले हुए शरीर के अंग और हड्डियां मिलीं। इनका DNA टेस्ट कराया जा रहा है, जिससे लापता लोगों की पहचान में मदद मिल सके। अधिकारियों के मुताबिक, अगर इन नमूनों का मिलान हो गया, तो लापता लोगों की संख्या घट सकती है।

ब्लास्ट के समय फैक्ट्री में थे 150 लोग

यह हादसा सुबह 8:15 से 9:30 बजे के बीच हुआ था। घटना के समय फैक्ट्री में करीब 150 लोग मौजूद थे। विस्फोट स्थल पर उस वक्त 90 से अधिक मजदूर और कर्मचारी काम कर रहे थे। उसी दिन मौके से 31 शव बरामद किए गए थे, जिनकी पहचान कर पाना कई मामलों में मुश्किल रहा।

प्रत्यक्षदर्शी बोले- मजदूर 100 मीटर दूर जा गिरे

एक प्रत्यक्षदर्शी मजदूर ने बताया कि वो सुबह 7 बजे नाइट शिफ्ट पूरी कर बाहर निकला था। उसके बाद की शिफ्ट के कर्मचारी फैक्ट्री में प्रवेश कर चुके थे। धमाका इतना तेज था कि कई मजदूर 100 मीटर तक उछलकर दूर जा गिरे। रिएक्टर यूनिट पूरी तरह विस्फोट में तबाह हो चुकी है।

मजदूरों के परिवारों पर टूटा कहर

एक पीड़ित महिला ने बताया कि उनके परिवार के चार सदस्य फैक्ट्री में काम करते थे— बेटा, दामाद, जेठ और देवर। इनमें से तीन उस दिन सुबह की शिफ्ट में थे और अभी तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। हादसे ने कई परिवारों की रोज़ी-रोटी और उम्मीदें एक झटके में छीन लीं।

मुआवजे की घोषणाएं और सहायता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PM राहत कोष से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार की मदद की घोषणा की है। वहीं, कंपनी ने मृतकों के परिवारों को ₹1 करोड़, गंभीर रूप से घायलों को ₹10 लाख और अन्य घायलों को ₹5 लाख मुआवजा देने की बात कही है।

बाहरी राज्यों के मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित

कंपनी के एक कर्मचारी के अनुसार, यहां काम करने वाले अधिकतर मजदूर मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार, ओडिशा और बंगाल से आते हैं। हर शिफ्ट में 60 से ज्यादा मजदूर और अन्य 40 लोग अलग-अलग विभागों में कार्यरत रहते हैं। घटना के बाद सबसे अधिक नुकसान इन प्रवासी मजदूरों को ही हुआ है।

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