शुक्रवार, मई 1, 2026
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ट्रम्प ने ओबामा की गिरफ्तारी का नकली वीडियो शेयर कर मचाया बवाल, आलोचना के घेरे में आए पूर्व राष्ट्रपति

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर सुर्खियों में हैं, इस बार वजह बना है एक फर्जी वीडियो। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा AI-जेनरेटेड वीडियो शेयर कर दिया जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को FBI एजेंट व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में गिरफ़्तार करते दिखाया गया है। वीडियो में ओबामा को ट्रम्प के पास बैठे दिखाया गया, फिर तीन एजेंट अंदर आते हैं, कॉलर पकड़कर उन्हें धक्का देते हैं और हथकड़ी पहनाकर ले जाते हैं। ट्रम्प पास में बैठे मुस्कुरा रहे होते हैं।

वीडियो की शुरुआत ओबामा के बयान से होती है

इस वीडियो की शुरुआत ओबामा के एक पुराने बयान से होती है जिसमें वो कहते हैं, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, यहां तक कि राष्ट्रपति भी नहीं।” इसके बाद वीडियो में कई डेमोक्रेटिक नेताओं की क्लिप्स जोड़ी गई हैं, जिसमें जो बाइडेन भी शामिल हैं। ये क्लिप्स इस बात को दोहराती हैं कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

ट्रम्प ने नहीं दी कोई सफाई, लोग बोले- लोकतंत्र के लिए खतरनाक

इस वीडियो को लेकर ट्रम्प की तरफ से अब तक कोई सफाई नहीं आई है कि यह फर्जी है या महज व्यंग्य। उन्होंने यह नहीं बताया कि ये वीडियो सिर्फ एक कल्पनात्मक दृश्य है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो की भारी आलोचना हो रही है। कई लोगों ने इसे “उकसाने वाला” बताया है और कहा कि एक पूर्व राष्ट्रपति का ऐसा फर्जी वीडियो शेयर करना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। कुछ आलोचकों का ये भी कहना है कि यह वीडियो जेफरी एपस्टीन केस से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है।

ट्रम्प पहले भी लगा चुके हैं ओबामा पर आरोप

डोनाल्ड ट्रम्प पहले भी ओबामा पर 2016 के चुनाव में उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि ओबामा प्रशासन ने उनके खिलाफ चुनावी धोखाधड़ी की प्लानिंग की थी। इस मामले में अमेरिका की पूर्व खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भी ट्रम्प के पक्ष में आई थीं और उन्होंने ओबामा के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर “देशद्रोही साजिश” का आरोप लगाया था।

तुलसी गबार्ड का दावा- फर्जी खुफिया रिपोर्ट बनाकर किया गया ट्रम्प को बदनाम

गबार्ड के मुताबिक, ओबामा की टीम ने जानबूझकर झूठी खुफिया जानकारी तैयार की और दावा किया कि रूस ने अमेरिकी चुनाव को प्रभावित किया। चुनाव से पहले जो खुफिया रिपोर्ट थी उसमें कहा गया था कि रूस हस्तक्षेप नहीं कर रहा, लेकिन चुनाव के बाद ये नैरेटिव पूरी तरह बदल गया। गबार्ड का ये भी दावा है कि ओबामा के कुछ सीनियर अधिकारियों ने जानबूझकर वॉशिंगटन पोस्ट और अन्य मीडिया को फर्जी सूचनाएं लीक कीं ताकि ट्रम्प को देशद्रोही साबित किया जा सके।

गबार्ड का आरोप- मीडिया को लीक किया गया ‘रूस होक्स’

गबार्ड के ऑफिस ने जो दस्तावेज जारी किए हैं, उनमें साफ तौर पर बताया गया है कि ओबामा प्रशासन के कुछ अफसरों ने 2016 के अंत में मीडिया को गलत जानकारी लीक की। उन्होंने दावा किया कि उसी रात CIA की एक गुप्त रिपोर्ट को लीक कर यह साबित करने की कोशिश की गई कि रूस ने ट्रम्प को जिताने के लिए हस्तक्षेप किया। गबार्ड ने इसे एक सुनियोजित और राजनीतिक साजिश करार दिया है, जो अमेरिकी जनता को भ्रमित करने और ट्रम्प के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने के मकसद से रची गई थी।

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  1. डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ओबामा की गिरफ्तारी का एक AI वीडियो शेयर किया, जो पूरी तरह फर्जी और काल्पनिक है।
  2. वीडियो में FBI एजेंट ओबामा को गिरफ़्तार करते और ट्रम्प को पास में मुस्कुराते हुए दिखाया गया है।
  3. इस वीडियो को लेकर ट्रम्प ने कोई सफाई नहीं दी, जिससे सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई।
  4. आलोचकों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और कहा कि एक पूर्व राष्ट्रपति को ऐसा गैरजिम्मेदार रवैया शोभा नहीं देता।
  5. इस विवाद के पीछे कुछ लोगों ने एपस्टीन केस से ध्यान भटकाने की साजिश भी बताई है, जबकि ट्रम्प-ओबामा की पुरानी सियासी लड़ाई भी चर्चा में आ गई है।
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