पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार वजह है सोशल मीडिया पर उनका साझा किया गया एक AI-जनरेटेड वीडियो, जिसमें दिखाया गया है कि FBI एजेंट बराक ओबामा को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में गिरफ्तार कर रहे हैं। यह वीडियो भले ही तकनीकी रूप से नकली हो, लेकिन इसका प्रभाव राजनीतिक हलकों में बहुत वास्तविक होता दिख रहा है।
वीडियो में दिखा गिरफ्तारी का नाटकीय दृश्य
इस वायरल वीडियो में ओबामा को ट्रम्प के बगल में बैठे हुए दिखाया गया है। तभी तीन FBI एजेंट कमरे में दाखिल होते हैं, ओबामा का कॉलर पकड़कर उन्हें ज़मीन पर गिरा देते हैं और हथकड़ियाँ पहनाते हैं। ट्रम्प मुस्कुराते हुए इस पूरे घटनाक्रम को देखते हैं। वीडियो के अंत में ओबामा जेल की नारंगी पोशाक में सलाखों के पीछे खड़े दिखते हैं।
वीडियो की शुरुआत ओबामा के एक पुराने बयान से होती है – “कोई भी, यहाँ तक कि राष्ट्रपति भी, कानून से ऊपर नहीं है।” इसके बाद डेमोक्रेट नेताओं, जिनमें जो बाइडेन भी शामिल हैं, के कुछ क्लिप्स जोड़ी गई हैं – “नो वन इज़ अबव द लॉ” की गूंज के साथ।
🚨 JUST IN: President Trump posted an AI video of Barack Obama being ARRESTED by FBI and rotting in a prison cell
— Nick Sortor (@nicksortor) July 20, 2025
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ट्रम्प की चुप्पी और लोगों की चिंता
इस वीडियो पर ट्रम्प की ओर से कोई सफाई अब तक नहीं आई है। उन्होंने यह नहीं बताया कि यह वीडियो महज कल्पना है या व्यंग्य। इस चुप्पी को लेकर उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कई नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत” बताया है।
वाशिंगटन में सक्रिय लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कहा है कि इस तरह का वीडियो, भले ही नकली हो, समाज में भ्रम फैलाने का साधन बन सकता है। कुछ ने इसे “जानबूझकर उकसावे की रणनीति” करार दिया है, जबकि कुछ का दावा है कि यह ट्रम्प के खिलाफ चल रही एपस्टीन मामले की जांच से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकती है।
ओबामा पर पहले भी लगे हैं आरोप
कुछ हफ्तों पहले ट्रम्प ने ओबामा प्रशासन पर 2016 के चुनाव में उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि ओबामा और उनकी टीम ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए खुफिया एजेंसियों का दुरुपयोग किया। इसी सिलसिले में अमेरिका की पूर्व खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने भी आरोप लगाए कि ओबामा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रम्प की जीत को “रूसी हस्तक्षेप” से जोड़ने के लिए गलत जानकारी गढ़ी थी।
गबार्ड ने बताया षड्यंत्र का पूरा खाका
गबार्ड के अनुसार, ओबामा और उनके छह प्रमुख अधिकारियों ने मिलकर एक साल लंबी साजिश रची, जिसमें फर्जी खुफिया रिपोर्टें तैयार की गईं और ट्रम्प को रूस समर्थित नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि यह रिपोर्ट एक ब्रिटिश खुफिया अधिकारी क्रिस्टोफर स्टील द्वारा बनाई गई थी, जिसे अमेरिकी एजेंसियों ने अविश्वसनीय करार दिया था, फिर भी इसे सबूत की तरह इस्तेमाल किया गया।
इस कथित साजिश में जिन नामों का जिक्र गबार्ड ने किया, उनमें जेम्स क्लैपर (तत्कालीन राष्ट्रीय खुफिया निदेशक), जॉन ब्रेनन (पूर्व CIA निदेशक), जॉन कैरी (तत्कालीन विदेश मंत्री), सुजैन राइस (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) और एंड्रयू मैक्केब (FBI डिप्टी डायरेक्टर) शामिल हैं।
AI वीडियो के बढ़ते खतरे पर बहस तेज
यह घटना न केवल ट्रम्प के राजनीतिक इरादों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि AI तकनीक के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ देती है। जब देश का पूर्व राष्ट्रपति इस तरह के वीडियो बिना किसी स्पष्टीकरण के साझा करता है, तो यह लोकतंत्र और नागरिक भरोसे के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता है।
टेक्नोलॉजी और पॉलिटिक्स के इस खतरनाक मेल ने एक बार फिर दिखाया है कि AI का इस्तेमाल अगर जवाबदेही के बिना किया गया, तो यह ना सिर्फ सच्चाई को धुंधला कर सकता है, बल्कि सामाजिक ध्रुवीकरण को भी बढ़ा सकता है।

